श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव संपूर्ण ब्रज में आनंद और उल्लास से भरा होता है। भजन गोपाला मेरे घर आया इसी दिव्य क्षण का वर्णन करता है, जब भक्त का मन श्रीकृष्ण के आगमन से आनंदित हो उठता है। जिस घर में स्वयं गोपाल पधारते हैं, वहां प्रेम, भक्ति और आनंद की अविरल धारा बहने लगती है। यह भजन भक्त के हृदय में भक्ति की उसी गहराई को प्रकट करता है।
Gopala Mere Ghar Aaya
मैं तो भर भर के बाटू बधाई,
गोपाला मेरे घर आया,
नन्द लाला मेरे घर आया।।1।।
बरसों से सोए मेरे,
भाग है जागे,
आज खुले है मेरी,
मन्नत के धागे,
दुनिया का पालक,
मेरे पलने में झूले,
हर सुख छोड़ू मैं तो,
इस सुख के आगे,
आँखे खुशियों से मेरी भर आई,
मेरा लाला मेरे घर आया,
नंदलाला मेरे घर आया।।2।।
खुशियों से आज मेरा,
आंगन खिला है,
सेवा का देखो मुझे,
यह फल मिला है,
गोद में मेरी सोया,
मेरा कन्हैया,
कितने नसीबो वाला,
आंचल मिला है,
‘सोनू’ किस्मत भी मेरी इतराई,
मेरा लाला मेरे घर आया,
नंदलाला मेरे घर आया।।3।।
मैं तो भर भर के बाटू बधाई,
गोपाला मेरे घर आया,
नन्द लाला मेरे घर आया।।4।।
भगवान श्रीकृष्ण जिस भक्त के जीवन में आते हैं, वहां केवल आनंद और भक्ति की लहरें उमड़ने लगती हैं। ऐसे ही भक्तिमय भजनों को पढ़ें और करें, जैसे सुन ओ कृष्ण की माँ बहुत दिन टाला है, जीमो जीमो म्हारा मदन गोपाल, कर्मा बाई रो खीचड़लो, दिल में उठी उमंग तेरे दीदार की और ब्रज की गली गली में शोर, आयो आयो माखन चोर, जिससे श्रीकृष्ण की भक्ति और भी गहरी हो जाए। ????????