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कैसे चुकाएं दातिए एहसान तेरे हम भजन लिरिक्स

कैसे चुकाएं दातिए एहसान तेरे हम—यह भजन माँ के उन अनगिनत उपकारों और कृपा की याद दिलाता है, जो वह अपने भक्तों पर सदा बनाए रखती हैं। माँ की महिमा अपरंपार है, और उनका प्रेम निरंतर हमारे जीवन को संवारता रहता है। यह गीत हमें माँ के प्रति आभार व्यक्त करने और उनकी भक्ति में समर्पित होने की प्रेरणा देता है। जब भी जीवन में कठिनाइयाँ आएं, माँ का नाम लेने से राहें खुद-ब-खुद आसान हो जाती हैं।

Kaise Chukaye Datiye Ehasan Tere Hum

कैसे चुकाएं दातिए,
एहसान तेरे हम,
इतना दिया तूने जो,
होगा कभी ना कम,
कैसे चुकाएँ दातिए,
एहसान तेरे हम।1।

भक्ति में जिसने तेरी,
जीवन बिताया रे,
आसान नहीं थी मंजिल,
रस्ता दिखाया रे,
हम जैसे पापियों पे भी,
तूने किये करम,
कैसे चुकाएँ दातिए,
एहसान तेरे हम।2।

उसका बिगाड़ सकती,
क्या मौत बाल भी,
रहमत से तेरी जिसके,
बस में हो काल भी,
फिर कैसे हारे कोई भी,
माने तेरे नियम,
कैसे चुकाएँ दातिए,
एहसान तेरे हम।3।

जिंदगी संवर गई मेरी,
मैया के नाम से,
खुशियां मिली हमें यहाँ,
तेरे ही साथ से,
रहमो करम तेरे सदा,
पाते रहे यूँ ही,
कैसे चुकाएँ दातिए,
एहसान तेरे हम।4।

कैसे चुकाएं दातिए,
एहसान तेरे हम,
इतना दिया तूने जो,
होगा कभी ना कम,
कैसे चुकाएँ दातिए,
एहसान तेरे हम।5।

माँ के एहसानों को कोई चुका नहीं सकता, लेकिन सच्चे मन से उनका स्मरण कर हम उनकी कृपा के पात्र जरूर बन सकते हैं। अगर माँ की महिमा में और भी डूबना चाहते हैं, तो “[महिमा निराली तेरी माँ जगदम्बे]” जैसे अन्य भक्तिगीतों को भी सुनें और भक्ति भाव से माँ के चरणों में शीश नवाएं। जय माता दी! ????✨

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