भक्ति का भाव ऐसा होता है कि भक्त माँ को जहाँ भी पुकारता है, वे प्रेमपूर्वक अपने भक्तों की सुध लेती हैं। माँ दुर्गा की महिमा का प्रभाव इतना व्यापक है कि हर कोई उन्हें अपने स्नेह और श्रद्धा से याद करता है। झुंझुनू की सेठाणी म्हानै याद करै भजन इसी आत्मीय भाव को प्रकट करता है, जहाँ माँ का आह्वान भक्तों के प्रेम और उनकी अपार भक्ति से ओत-प्रोत होता है। यह भजन माँ के प्रति हमारे हृदय में बसे प्रेम और समर्पण को और भी गहरा कर देता है।
Jhunjhunu Ki Sethari Mhanei Yad Karei
झुंझुनू की सेठाणी,
म्हानै याद करै,
मेहंदी नथली,
चुड़ो चुनड़ी,
आंख्या आगै फिरै,
झुंझुणु की सेठाणी,
म्हानै याद करै।1।
हिचकी आवै आंख फरुकै,
कान में गूंजै शोर,
दौड़यो भाग्यो आज्या रे बेटा,
तू झुंझुणु की ओर,
मावड़ी है खड़ी,
तो तू क्यां नै डरै,
झुंझुणु की सेठाणी,
म्हानै याद करै।2।
नेम धरम जपतप ना जाणूं,
ना कोई ज्ञान की बात,
फेर भी तू मनै दरपे बुलावै,
कितणी बड़ी है बात,
रिश्तो यो आपणो,
माँ निभायां सरै,
झुंझुणु की सेठाणी,
म्हानै याद करै।3।
‘अम्बरीष’ की और भगतां की,
गळत्यां दीजै बिसराय,
यूं ही मान बढ़ाती रहिजै,
अपणे दरपे बुलाय,
तू ही तो म्हारो घर,
खुशियां से भरै,
झुंझुणु की सेठाणी,
म्हानै याद करै।4।
झुंझुनू की सेठाणी,
म्हानै याद करै,
मेहंदी नथली,
चुड़ो चुनड़ी,
आंख्या आगै फिरै,
झुंझुणु की सेठाणी,
म्हानै याद करै।5।
माँ दुर्गा अपने भक्तों की पुकार कभी अनसुनी नहीं करतीं, चाहे वे उन्हें कहीं से भी पुकारें। झुंझुनू की सेठाणी म्हानै याद करै भजन हमें यह अनुभूति कराता है कि माँ हर भक्त के प्रेम को स्वीकार करती हैं और उन्हें अपने आशीर्वाद से नवाजती हैं। यदि यह भजन आपको भक्ति-रस से भर देता है, तो “माँ तेरा दरबार निराला है” भजन भी अवश्य करे, जिसमें माँ की भव्यता और भक्तों पर उनकी कृपा का अनुपम वर्णन किया गया है।