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जाना है मुझे माँ के दर पे सुनो बाग के माली भजन लिरिक्स

जब मन में भक्ति का सागर उमड़ता है, तो हर भक्त माँ के दरबार में हाज़िरी लगाने को व्याकुल हो उठता है। जाना है मुझे माँ के दर पे सुनो बाग के माली भजन भी इसी भाव को दर्शाता है, जहाँ भक्त माँ के चरणों तक पहुँचने की तड़प को व्यक्त करता है। यह सिर्फ़ एक गीत नहीं, बल्कि माँ दुर्गा के प्रति समर्पण और श्रद्धा की भावना से भरी एक अनमोल अभिव्यक्ति है।

Jana Hai Mujhe Maa Ke Dar Pe Suno Baag Ke Mali

जाना है मुझे माँ के दर पे,
सुनो बाग के माली,
मेरी माँ के लिए,
माला पिरो दे अजब निराली,
पहन जिसे खुश हो जाए,
मेरी मैया शेरावाली,
मेरी माँ के लिए,
माला पिरो दे अजब निराली।।

भांत भांत के फूल और कलियाँ,
चुन बगिया से लाना,
श्रद्धा के धागे में प्रेम की,
सुई से फूल सजाना,
मुंह माँगा तुझे दाम मैं दूंगा,
मुंह माँगा तुझे दाम मैं दूंगा,
बात नहीं डर वाली,
मेरी माँ के लिए,
माला पिरो दे अजब निराली।।

गेंदा गुलाब चमेली चम्पा,
मरुआ और गुलद्वारी,
सूरजमुखी रात की रानी,
मोतिया जूही कचनारी,
संदल कमल मोगरा संग में,
संदल कमल मोगरा संग में,
लाजवंती मतवाली,
मेरी माँ के लिए,
माला पिरो दे अजब निराली।।

पहने जब माला मेरी माँ,
सुख अमृत बरसा दे,
‘कँवल सरल’ से भक्तो की,
सोई तक़दीर जगा दे,
खिल जाए ‘लख्खा’ के मन की,
खिल जाए ‘लख्खा’ के मन की,
मुरझाई जो डाली,
मेरी माँ के लिए,
माला पिरो दे अजब निराली।।

जाना है मुझे माँ के दर पे,
सुनो बाग के माली,
मेरी माँ के लिए,
माला पिरो दे अजब निराली,
पहन जिसे खुश हो जाए,
मेरी मैया शेरावाली,
मेरी माँ के लिए,
माला पिरो दे अजब निराली।।

Singer – Lakhbir Singh Lakkha Ji

माँ के दरबार में जो भी जाता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता। माँ अपनी कृपा-दृष्टि से अपने भक्तों का जीवन संवार देती हैं। अगर आपकी भी आस्था माँ के चरणों में है और आप उनकी महिमा को और गहराई से महसूस करना चाहते हैं, तो [“तरस रही है तेरे दरस को कबसे मेरी नजरिया”](भजन का लिंक) भजन भी अवश्य सुनें। माँ के चरणों में शीश झुकाएँ और उनकी असीम कृपा का अनुभव करें। जय माता दी! ????????

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