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जय जय हे माँ अष्ट भवानी दुर्गा अमृतवाणी लिरिक्स

जय जय हे माँ अष्ट भवानी दुर्गा अमृतवाणी भजन में माँ दुर्गा की आठ स्वरूपों की महिमा का वर्णन किया गया है। यह भजन उन भक्तों के दिलों को जागृत करता है जो माँ के प्रति अपनी श्रद्धा और विश्वास को व्यक्त करना चाहते हैं। माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना इस भजन में की जाती है, जो जीवन के प्रत्येक पहलू में शक्ति, साहस, और संजीवनी शक्ति का संचार करती है।

Jai Jai Hey Maa Asht Bhawani Durga Amritvani Lyrics

जय जय हे माँ अष्ट भवानी,
जय जय हे माँ अम्बे रानी,
माता तेरी अकथ कहानी,
मुख से माँ ना जाए बखानी।।

तू ही दुर्गा तू ही काली,
भक्तों की तू ही रखवाली,
हे दुख हरणी मंगल करणी,
तू ही मैया है सुख करणी।।

टीका मस्तक पर है साजे,
लाल चुनरिया मां को भाए,
एक हाथ में खप्पर सोहे,
दूजे हाथ में खड्ग बिराजे।।

नाम तुम्हारा जो भी ध्याए,
उसके बिगड़े काम बनाएं,
जो श्रद्धा से करे कामना,
पूरी हो सब मनोकामना।।

तू ब्रह्माणी तू रुद्राणी,
तू ही मैया वैष्णो रानी,
तू ही लक्ष्मी कमला रानी,
तू ही काली अम्बे रानी।।

तू ही कर्ता तू ही भर्ता,
तु ही सबकी पालन कर्ता,
मैया तेरा व्रत जो करता,
अकाल मौत मां वो न मरता।।

शेष गणेश महेश दिनेशा,
करतें हैं सब तेरी आशा,
सैल सुता मां शक्तिसाला,
सकल मनोरथ देने वाला।।

तेरी कृपा मां जब होती,
भूखे को मिलती है रोटी,
अंधा पावे आंख की ज्योति,
मैया जी जब मौज में होती।।

शुम्भ निशुम्भ को है संहारा,
महिषासुर को तुमने मारा,
तेरी महिमा अपरम्पारा,
गाता है मां यह जग सारा।।

जो भी तेरी पूजा करता,
नित्य नियम से सेवा करता,
सांझ सबेरे ध्यान को करता,
सफल वो अपना जीवन करता।।

नव दुर्गा नौ नाम तुम्हारे,
सबके बिगड़े काम संवारे,
जो भी आए द्वार तुम्हारे,
उसकी नैया पार उतारे।।

तू ही शारदे हंस वाहिनी,
तू ही मैया सिंह वाहिनी,
मैया तू ही मुक्ति दायनी,
मैया तू ही वर दायनी।।

जाप निरंतर करे जो कोई,
उसका कभी अहित न होई,
जो मैया की महिमा गावे,
मां चरणों की रज वो पावे।।

दीन दुखी की सदा सहाय,
आती मां बिन देर लगाए,
सुनती है भक्तों की मैया,
जो करूणा भरी टेर लगाए।।

वैदों में है महिमा वांची,
मेरी मैया जी है सांची,
वेद पुराण सकल सब गाएं,
फिर भी महिमा गाई न जाए।।

स्वांस स्वांस जो नाम जपेगा,
निश्चय ही वो भव से तरेगा,
न चिंता न भय कोई होगा,
सिर पर हाथ जो मां का होगा।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि की दाता,
मेरी अम्बे दुर्गे माता,
जिस घर तेरी ज्योत जले मां,
दुख दारिद्र सब दूर भगे मां।।

जो भी तेरी शरण मां आए,
जो चरणों का ध्यान लगाए,
भक्ति अपनी सभी को दीजै,
शरण में मैया सबको लीजै।।

जग कल्याणी जग हितकारी,
करती तुम जग की रखवारी,
केवल नाम तुम्हारा मैया,
कलियुग में है मंगलकारी।।

मैं अवगुण की खान हूं मैया,
तुम सकल गुण खान हो मैया,
मैं अधमी अति नीच हूं मैया,
तुम मुक्ति का धाम हो मैया।।

मैया चरणों में तेरे,
लाख लाख प्रणाम,
भजता रहे यह दास ‘शिव’,
तुमको आठों याम।।

जय जय हे माँ अष्ट भवानी,
जय जय हे माँ अम्बे रानी,
माता तेरी अकथ कहानी,
मुख से माँ ना जाए बखानी।।

लेखक / प्रेषक – शिवनारायण जी वर्मा।

“जय जय हे माँ अष्ट भवानी दुर्गा अमृतवाणी” भजन में माँ दुर्गा की शक्ति और उनके अद्वितीय रूपों की स्तुति की गई है। जैसे “संकट हरनी मंगल करनी” और “तेरे द्वार पे आने वालों ने क्या अजब नजारा देखा है” भजन में भी माँ की कृपा और आशीर्वाद से भक्तों की जीवन की समस्याएं दूर होती हैं, उसी प्रकार इस भजन में भी माँ दुर्गा के आठ रूपों की उपासना से भक्तों को संजीवनी शक्ति मिलती है। उनके आशीर्वाद से जीवन के सभी संकट समाप्त हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है। जय माँ दुर्गा! ????

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