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जब सिर पे गुरु जी का हाथ फिर मन तोहे चिंता काहे की

गुरुदेव की कृपा से जीवन के हर संकट का समाधान संभव हो जाता है। जब उनके आशीर्वाद का हाथ हमारे सिर पर होता है, तो फिर चिंता किस बात की? “जब सिर पे गुरु जी का हाथ फिर मन तोहे चिंता काहे की” भजन इसी गहरे विश्वास और समर्पण की भावना को दर्शाता है। जब हम इस भजन को पढ़ते या करते हैं, तो हमें गुरुदेव की अपार कृपा और सुरक्षा का अनुभव होता है, जिससे मन निडर और संतुष्ट हो जाता है।

Jab Shir Pe Guru Ji Ka Hath Phir Man Tohe Chinta Kahe Ki

दोहा
गुरू समरथ सिर पर खड़े,
कहा कमी तोहि दास,
रिध्दि सिध्दि सेवा करै,
मुक्ति न छाड़ै पास।
गुरु की आज्ञा वही,
और गुरु की आज्ञा जाए,
कहे कबीर ता दास को,
तीन लोक भय नाहि।

जब सिर पे गुरु जी का हाथ,
फिर मन तोहे चिंता काहे की,
फिर मन तोहे चिंता काहे की,
फिर मन तोहे चिंता काहे की।।

गुरु अपनी शरण लगाए लेंगे,
चरणों में तुझे बिठाये लेंगे,
और ऐसे है दीन दयाल,
फिर मन तोहे चिंता काहे की।।

मेरे सतगुरु मथुरा काशी है,
सत चेतन घन आनंद राशि है,
और ऐसे है गरीब नवाज़,
फिर मन तोहे चिंता काहे की।।

भव सागर एक नदियाँ गहरी,
इसमें डूब रहे नर नारी,
तेरा बेडा करेंगे पार,
फिर मन तोहे चिंता काहे की।।

हंस वंश का लगा है मेला,
गुरु पूजा की यही शुभ बेला,
अब आ गए हंस के लाल,
फिर मन तोहे चिंता काहे की।।

जब सर पे गुरु जी का हाथ,
फिर मन तोहे चिंता काहे की,
फिर मन तोहे चिंता काहे की,
फिर मन तोहे चिंता काहे की।।

गुरुदेव की छत्रछाया में भक्त का मन निश्चिंत और शांत रहता है, क्योंकि उनकी कृपा से जीवन की हर समस्या का समाधान मिल जाता है। यदि यह भजन आपको श्रद्धा और भक्ति से भरता है, तो “गुरु मात पिता गुरु बंधू सखा”, “संतों का समागम भक्तों को तीर्थ से भी बढ़कर होता है”, “सतगुरु ने दिया आनंद भजन कर जीवन में” और “गुरुदेव की महिमा अपरंपार” जैसे अन्य भजनों को भी पढ़ें और गुरुदेव की कृपा का अनुभव करें।









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