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जब जब भी पुकारू माँ तुम दौड़ी चली आना लिरिक्स

भक्ति के मार्ग पर चलने वाला हर भक्त अपनी माँ, विशेषकर देवी दुर्गा की असीम कृपा और मार्गदर्शन की कामना करता है। जब जब भी पुकारू माँ तुम दौड़ी चली आना भजन में भक्त अपनी निष्ठा और विश्वास के साथ माँ से यह प्रार्थना करता है कि जब भी वह कष्टों या मुश्किलों में हो, माँ उसकी पुकार सुनें और अपनी शक्ति से उसे मार्ग दिखाएं।

Jab Jab Bhi Pukaru Maa Tum Daudi Chali Aana

जब जब भी पुकारू माँ,
तुम दौड़ी चली आना,
एक पल भी नहीं रुकना,
मेरा मान बड़ा जाना।1।

इस दुनियां वालो ने,
माँ बहुत सताया है,
जब आंसू बहे मेरे,
तुम पौंछने आ जाना,
जब जब भी पुकारू मां,
तुम दौड़ी चली आना।2।

नवरात्री महीने में,
माँ कन्या जिमाउंगी,
जब हलवा बने मैया,
तुम भोग लगा जाना,
जब जब भी पुकारू मां,
तुम दौड़ी चली आना।3।

सावन के महीने में,
माँ झूला लगाउंगी,
जब झूला पड़े मैया,
तुम झूलने आ जाना,
जब जब भी पुकारू मां,
तुम दौड़ी चली आना।4।

मैं बेटी तेरी हूँ,
तू भूल ये मत जाना,
जब अंत समय आये,
मुझे दर्श दिखा जाना,
जब जब भी पुकारू मां,
तुम दौड़ी चली आना।5।

मैं रह ना सकुंगी माँ,
तुम छोड़ के मत जाना,
जब प्राण उड़े मेरे,
मुझे गोद उठा लेना,
जब जब भी पुकारू मां,
तुम दौड़ी चली आना।6।

जब जब भी पुकारू माँ,
तुम दौड़ी चली आना,
एक पल भी नहीं रुकना,
मेरा मान बड़ा जाना।7।

माँ की उपस्थिति और उनका आशीर्वाद भक्तों के जीवन में एक अमूल्य ऊर्जा का संचार करते हैं। “जब जब भी पुकारू माँ तुम दौड़ी चली आना” भजन में भक्त माँ से अपनी पुकार को स्वीकार करने की प्रार्थना करता है, और यह भजन माँ की उस अनंत दया को दर्शाता है जो हर समय अपने भक्तों के साथ रहती है। जब हम सच्चे दिल से माँ को पुकारते हैं, तो उनका आशीर्वाद हम पर हमेशा बरसता है। इस भजन की भक्ति से प्रेरित होकर, आप मेरी माँ आ जाती मेरे सामने, दर दर भटकता फिरा ठोकर बड़ी खाया हूँ , दुर्गा जी के मन्दिर में गूंज रही जयकार भजन भी सुन सकते हैं, जो माँ की उपस्थिति और उनके प्रेम को और गहराई से अनुभव कराता है।

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