Ik Lahari Dar Ghunghat Mathe Pe Dal Ke Shiv Bhajan Lyrics
इक लहरी दार घूंघट,
माथे पे डाल के,
भोले बन गये जनाना,
घुंघटा निकाल के,
भोले बन गये जनाना,
घुंघटा निकाल के।।
बिच्छू बाला कान में डाला,
गले मुंड की माला,
गले मुंड की माला,
कमर करधनां कसके बांधा,
नाग वो काला काला,
नाग वो काला काला,
सर्पों को रखेंगे प्यारी,
कौंछे में सम्भाल के,
भोले बन गये जनाना,
घुंघटा निकाल के।।
सब कुछ तुमने छुपा लिया,
कहाँ छुपे गंग का पानी,
कहाँ छुपे गंग का पानी,
छुपा सकोगे तुम प्रियतम ना,
ये मरदानी वानी,
ये मरदानी वानी,
पकड़े ना जाओ स्वामी,
मरदानी चाल से,
भोले बन गये जनाना,
घुंघटा निकाल के।।
नटवर पलट दिया घूंघट तो,
तब भोले मुस्काये,
तब भोले मुस्काये,
यहीं से शिवशंकर भोले हैं,
गोपेश्वर कहलाये,
गोपेश्वर कहलाये,
मथुरा में पुजते भोले,
गोपेश्वर नाम से,
भोले बन गये जनाना,
घुंघटा निकाल के।।
इक लहरी दार घूंघट,
माथे पे डाल के,
भोले बन गये जनाना,
घुंघटा निकाल के,
भोले बन गये जनाना,
घुंघटा निकाल के।।
भोलेनाथ की लीला अपरंपार है और उनके भजनों में हमें उनका स्वरूप, करुणा और विराट प्रेम समाहित दिखता है। इस भजन “इक लहरीदार घूंघट माथे पे डाल के” को जो भक्त प्रेम से पढ़ते या गाते हैं, वे शिव की भक्ति में रम जाते हैं। आप ऐसे ही शिव भक्ति से परिपूर्ण अन्य भजन भी पढ़ सकते हैं जैसे: “भोले तेरी निराली शान”, “महाकाल की शरण में”, “शिव ही सत्य है शिव ही सुंदर”, और “जपते रहो सुबह शाम भोलेनाथ”। हर भजन में है शिव की छाया, शिव की महिमा। हर हर महादेव!