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गुरु बिन कौन करे भव पारा भजन लिरिक्स

जीवन रूपी सागर को पार करने के लिए हमें एक सच्चे गुरु का सहारा चाहिए। “गुरु बिन कौन करे भव पारा” भजन इसी सत्य को उजागर करता है कि बिना गुरु की कृपा के यह भवसागर पार करना असंभव है। यह भजन श्रद्धा, समर्पण और गुरु की महिमा का अद्भुत वर्णन करता है।

Guru Bin Kaun Kare Bhav Para

श्लोक
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः
गुरुर्देवो महेश्‍वरः,
गुरु साक्षात्‌ परब्रह्म,
तस्मै श्रीगुरुवे नमः।।

गुरु बिन कौन करे भव पारा,
कौन करे भव पारा,
कौन करे भव पारा,
गुरु बिन कौन करे भव पारा।।

जबसे गुरु चरणन में आयो,
जबसे गुरु चरणन में आयो,
दूर हुआ अँधियारा,
दूर हुआ अँधियारा,
दूर हुआ अँधियारा,
गुरु बिन कौन करे भव पारा।।

गुरु पंथ निराला पगले,
गुरु पंथ निराला पगले,
चलत चलत जग हारा,
चलत चलत जग हारा,
चलत चलत जग हारा,
गुरु बिन कौन करे भव पारा।।

चौरासी के बंधन काटे,
चौरासी के बंधन काटे,
बहा प्रेम की धारा,
बहा प्रेम की धारा,
बहा प्रेम की धारा,
गुरु बिन कौन करे भव पारा।।

जड़ चेतन को ज्ञान सिखावे,
जड़ चेतन को ज्ञान सिखावे,
जिसमे है जग सारा,
जिसमे है जग सारा,
जिसमे है जग सारा,
गुरु बिन कौन करे भव पारा।।

गुरु की शरण में जाने से ही जीवन सफल होता है, और उनकी कृपा से सभी कष्ट मिट जाते हैं। अगर यह भजन आपको भक्ति के भाव से भर गया, तो “गुरुदेव मेरे दाता मुझको ऐसा वर दो”, “गुरुदेव तेरी दुनिया से कैसे मैं प्यार करूँ”, “बेड़ा तर जाए ये भव से यही अरदास करता हूँ”, और “तेरे चरणों में सतगुरु मेरी प्रीत हो” भी अवश्य पढ़ें।









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