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दर्शन को हम तरसे ओ भोले तेरे लिरिक्स

दर्शन को हम तरसे ओ भोले तेरे — यह भजन उन भक्तों की व्यथा को दर्शाता है जो शिव शंकर के दिव्य दर्शन की अभिलाषा लिए उनके दरबार में आते हैं। महादेव के भक्त सदियों से उनके दर्शन के लिए तप, साधना और भक्ति में लीन रहते हैं, क्योंकि शिव के दर्शन मात्र से जीवन धन्य हो जाता है। यह भजन शिव की असीम कृपा और उनके प्रेम को महसूस कराने वाला है। तो आइए, इस भावपूर्ण भजन के माध्यम से भोलेनाथ का स्मरण करें और उनके पावन चरणों की ओर बढ़ें।

Darshan Ko Ham Tarse O Bhole Tere

दर्शन को हम तरसे,
ओ भोले तेरे,
दर्शन को हम तरसें,
ओ भोले तेरे।1।

तेरे द्वार दीप जलाते,
आये कई युग से,
भक्ति भाव स्वीकारो मेरे,
एक विनय तुमसे,
दर्शन को हम तरसें,
ओ भोले तेरे।2।

मांगे न हम हीरे मोती,
शिव शंकर तुझसे,
मांग रहे है किरपा तेरी,
प्रभु कई जनमन से,
दर्शन को हम तरसें,
ओ भोले तेरे।3।

चांद सितारे ये कैलाशी,
मांगे न तुझसे,
‘राजेंद्र’ को ऐसा वर दे,
तू हिरदय बीच बसे,
दर्शन को हम तरसें,
ओ भोले तेरे।4।

दर्शन को हम तरसे,
ओ भोले तेरे,
दर्शन को हम तरसें,
ओ भोले तेरे।5।

भोलेनाथ के दर्शन मात्र से जीवन के समस्त दुखों का अंत हो जाता है। महादेव के भक्तों को कभी खाली हाथ नहीं लौटना पड़ता, क्योंकि शिव अपनी कृपा से सबकी झोली भर देते हैं। जो सच्चे मन से उनका नाम लेता है, उसे शिव साक्षात दर्शन देते हैं। यदि यह भजन आपके मन को शिवमय कर रहा है, तो कैसे दर आऊं मैं तेरे दरश पाने को, शरण में हम तुम्हारे आ पड़े हैं, भोले के हाथों में है भक्तों की डोर, और सवारी महाकाल की आई जैसे अन्य शिव भजनों को भी अवश्य करें। हर हर महादेव! ????????

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