चांद तारों से भी है प्यारा रुपवा तेरा

माँ दुर्गा का रूप इतना अलौकिक और मनमोहक है कि उसकी तुलना किसी भी सांसारिक सौंदर्य से नहीं की जा सकती। जब भक्त माँ की छवि का ध्यान करता है, तो उसे ऐसा प्रतीत होता है मानो चाँद और तारे भी उनके तेजस्वी स्वरूप के आगे फीके पड़ गए हों। चांद तारों से भी है प्यारा रुपवा तेरा भजन माँ की इसी अनुपम सुंदरता और दिव्यता का गुणगान करता है, जो भक्तों को उनकी ओर आकर्षित करती है और उनकी असीम कृपा का अनुभव कराती है। आइए, इस मधुर भजन के माध्यम से माँ के अनुपम सौंदर्य को नमन करें।

Chand Taron Bhi Pyara Rupva Tera

चांद तारों से भी है प्यारा, रुपवा तेरा,
मन में बस जाए ना भूल पाए, रुपवा तेरा,
चांद तारो से भी है प्यारा, रुपवा तेरा।1।

एक दूजे के संग में, दौड़े चले आयेंगे,
दर पे तेरे मैया शीश, हम झुकाएंगे,
तेरे आने से महक जाए, अंगना मेरा,
चांद तारो से भी है प्यारा, रुपवा तेरा।2।

प्रेम श्रद्धा से मैया रानी, को बुलायेंगे,
हार फूलों का अपनी, मैया को चढ़ाएंगे,
पूर्ण होगा तभी जीवन का, सपना मेरा,
चांद तारो से भी है प्यारा, रुपवा तेरा।3।

माँ की ममता को, हम ना भूल पाएंगे,
कर्ज तेरा कभी भी हम ना, चुका पाएंगे,
कर ले स्वीकार मेरी पूजा, वंदन मेरा,
चांद तारो से भी है प्यारा, रुपवा तेरा।4।

चांद तारों से भी है प्यारा, रुपवा तेरा,
मन में बस जाए ना भूल पाए, रुपवा तेरा,
चांद तारो से भी है प्यारा, रुपवा तेरा।5।

माँ दुर्गा का रूप केवल बाहरी सौंदर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि उनकी करुणा, शक्ति और प्रेम का द्योतक है, जो हर भक्त को स्नेह से अभिभूत कर देता है। चांद तारों से भी है प्यारा रुपवा तेरा भजन हमें माँ की दिव्यता का बोध कराता है और हमें उनकी भक्ति में लीन होने के लिए प्रेरित करता है। यदि यह भजन आपके हृदय को श्रद्धा से भर देता है, तो “तेरा दरबार बड़ा निराला है माँ” भजन भी अवश्य करे, जिसमें माँ की कृपा और भव्यता का सुंदर वर्णन किया गया है।

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