चले है भोला सज धज के शिव भजन लिरिक्स

चले है भोला सज धज के भजन, भोलेनाथ के दिव्य रूप और उनकी महिमा का वर्णन करता है। यह भजन उनके सौम्य और शक्तिशाली रूप की कल्पना करता है, जब वह अपनी संजीवनी शक्ति से जगत को अभय देते हैं। शिव जी का यह रूप एक भक्त के ह्रदय में अद्भुत श्रद्धा और भक्ति का संचार करता है। इस भजन के माध्यम से हम उनके प्रति अपनी निष्ठा और प्रेम को व्यक्त करते हैं, जो हमें जीवन की कठिनाइयों से बाहर निकालने में सहायक होते हैं।

Chale Hai Bhola Saj Dhaj Ke

भोला तन पे भस्म लगाये,
मन में गौरा को बसाये।
चले है भोला,
सज धज के।
संखिया मंगल गाती हैं,
भूत प्रेत बाराती हैं।।

भूत और प्रेत सब,
झूम झूम जाते हैं।
लूले और लँगड़े भी,
डिस्को दिखाते हैं।
भोला मन ही मन मुस्काये,
रूप अजब गजब हैं बनाये।
चले हैं भोला,
सज धज के।।

पहुँची बारात,
सब मंगल गाते हैं।
देख देख शिव को,
सभी डर जाते हैं,
माता मैना रही घबराये।
शिव ऐसा रूप बनाये,
चले हैं भोला,
सज धज के।।

मन में ये सोचें शिव,
सब डर जाते हैं,
विवाह कैसे होगा।
कोई पास न आते हैं,
तब सुंदर रूप बनाये।
चन्द्रशेखर नाम कहाये,
चले हैं भोला,
सज धज के।।

गौरा के संग में,
ब्याह रचाते हैं।
लेके भवानी को,
कैलाश जाते हैं।
‘सूरज सोनी’ हरसाये,
ध्यान शिवजी के चरणों मे लगाए।
चले हैं भोला,
सज धज के।।

भोला तन पे भस्म लगाये,
मन में गौरा को बसाये।

चले है भोला,
सज धज के।
संखिया मंगल गाती हैं,
भूत प्रेत बाराती हैं।।

भोलेनाथ की महिमा अपरंपार है और उनकी भक्ति में हर शंका और डर दूर हो जाता है। वह जो भी भक्त उनके चरणों में सच्चे मन से आता है, वह कभी भी निराश नहीं होता। शिव के भजनों में शक्ति और शांति दोनों मिलती है। शिव शंकर की पूजा, भोलेनाथ का आशीर्वाद, और शिव रात्रि के भजन जैसे अन्य भजनों से हम उनकी उपासना को और अधिक गहराई से समझ सकते हैं।

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