Vaishno Mata Aarti | वैष्णो माता की आरती : सुख और शांति

Vaishno Mata Aarti जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता, हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥ !! जय वैष्णवी माता !! शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी, गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥ !! जय वैष्णवी माता !! ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे, सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥ !! जय वैष्णवी माता !! सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे, बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥ !! जय वैष्णवी माता !! भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे, ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे॥ !! जय वैष्णवी माता !! पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा, दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा॥ !! जय वैष्णवी माता !! जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे, उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे॥ !! जय वैष्णवी माता !! इतनी स्तुति निश-दिन, जो नर भी गावे, कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे॥ !! जय वैष्णवी माता !!

माता वैष्णो जी के मंदिर में आरती दिन में दो बार किया जाता है, हम आप को बता दे यदि आप माता वैष्णो जी की आरती के लिए वैष्णो जी मंदिर जाना चाहते हैं तो आप ख़ुशी से जा कर वहाँ Vaishno Mata Aarti कर सकते हैं, लेकिन जो भक्त वैष्णो देवी के मंदिर नहीं … Read more

Saraswati Mata Ki Aarti | सरस्वती माता की आरती : सफलता की प्राप्ति

Saraswati Mata Ki Aarti ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता ! सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता !! !! ॐ जय जय सरस्वती माता… !! देवी शरण जो आएं, उनका उद्धार किया ! पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया !! !! ॐ जय जय सरस्वती माता… !! विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो ! मोह, अज्ञान, तिमिर का जग से नाश करो !! !! ॐ जय जय सरस्वती माता… !! धूप, दीप, फल, मेवा मां स्वीकार करो ! ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो !! !! ॐ जय जय सरस्वती माता… !! मां सरस्वती की आरती जो कोई जन गावें ! हितकारी, सुखकारी, ज्ञान भक्ती पावें !! !! ॐ जय जय सरस्वती माता… !! जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता ! सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता !! !! ॐ जय जय सरस्वती माता… !! ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता ! सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता !! !! ॐ जय जय सरस्वती माता… !!

सरस्वती माता की आरती और पूजा करने से आप हर मुश्किल काम को आसानी से सिखने की क्षमता रख पाते हैं, आप संगीत, नृत्य, ज्ञान और किसी भी प्रकार की कला में महारथ हासिल कर पाते है। Saraswati mata ki aarti करने से माँ का आशीर्वाद हमेशा आप पर बना रहता है।  सरस्वती माता को … Read more

Krishna Aarti | कृष्ण आरती : भक्ति का मधुर संगम

Krishna Aarti !! आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की !! !! आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की !! गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला... श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला !! गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली... लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक !! चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की... !! श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की !! कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं... गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग ग्वालिन संग !! अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की !! आरती कुंजबिहारी की !! जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा... स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस !! जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की !! श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की !! चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू... चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू !! हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद... टेर सुन दीन दुखारी की !! !! श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की !! !! आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की !! !! आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की !!

श्रीकृष्ण आरती भक्तों के लिए एक ऐसा अनुभव है, जो मन और आत्मा को शांति और आनंद से भर देता है। भगवान श्रीकृष्ण, जिन्हें प्रेम, करुणा और चमत्कारों का प्रतीक माना जाता है, की आरती करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। Krishna Aarti के मधुर शब्द और भक्तिमय स्वर न केवल … Read more

Brihaspati Dev Ki Aarti | बृहस्पतिदेव आरती : देवताओं के गुरु

Brihaspati Dev Ki Aarti ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा... छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा !! !! ॐ जय बृहस्पति देवा... !! तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी... जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥ !! ॐ जय बृहस्पति देवा… !! चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता... सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता॥ !! ॐ जय बृहस्पति देवा… !! तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े... प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े॥ !! ॐ जय बृहस्पति देवा… !! दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी... पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी॥ !! ॐ जय बृहस्पति देवा… !! सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो... विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी॥ !! ॐ जय बृहस्पति देवा… !! जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे... जेष्टानंद बंद सो-सो निश्चय पावे॥ !! ॐ जय बृहस्पति देवा… !!

बृहस्पतिदेव को देवताओं का गुरु माना जाता है।बृहस्पतिदेव आरती, पूजा और व्रत करने से आप के पास कभी भी धन की कमी नहीं होती है।  बृहस्पतिदेव को भगवान विष्णु का अंशावतार बताया गया है। जिस साधक की कुंडली में बृहस्पति कमजोर स्थिति में होता है तो Brihaspati dev ki aarti, पूजा और व्रत करने से … Read more

Vishnu Ji Ki Aarti | विष्णु जी की आरती : मनोकामनाओं की पूर्ति

Vishnu Ji Ki Aarti ॐ जय जगदीश हरे — स्वामी! जय जगदीश हरे... भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे !! जो ध्यावै फल पावै — दुख बिनसे मन का... सुख-संपत्ति घर आवै — कष्ट मिटे तन का !! !! ॐ जय !! मात-पिता तुम मेरे — शरण गहूं किसकी... तुम बिनु और न दूजा — आस करूं जिसकी !! !! ॐ जय !! तुम पूरन परमात्मा — तुम अंतरयामी... पारब्रह्म परेमश्वर — तुम सबके स्वामी !! !! ॐ जय !! तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता... मैं मूरख खल कामी — कृपा करो भर्ता !! !! ॐ जय !! तुम हो एक अगोचर — सबके प्राणपति... किस विधि मिलूं दयामय तुमको मैं कुमति !! !! ॐ जय !! दीनबंधु दुखहर्ता — तुम ठाकुर मेरे... अपने हाथ उठाओ — द्वार पड़ा तेरे !! !! ॐ जय !! विषय विकार मिटाओ — पाप हरो देवा... श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ — संतन की सेवा !! !! ॐ जय !! तन-मन-धन और संपत्ति — सब कुछ है तेरा... तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा !! !! ॐ जय !! जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे... कहत शिवानंद स्वामी — मनवांछित फल पावे !! !! ॐ जय !!

हमारे हिन्दू धर्म में विष्णु जी की आरती, व्रत और पूजा करने से पुण्य मिलता है और भगवान विष्णु जल्दी प्रसन्न होते हैं। Vishnu ji ki aarti करने से आप की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, Vishnu bhagwan ji ki aarti करने के लिए आप व्रत भी रख सकते हैं यदि नहीं रख पाते हैं तो सिर्फ … Read more

Chandraghanta Mata ki Aarti | चंद्रघंटा माता की आरती : शुभ फलों की प्राप्ति

chandraghanta mata ki aarti जय मां चंद्रघंटा सुख धाम, पूर्ण कीजो मेरे सभी काम !! चंद्र समान तुम शीतल दाती, चंद्र तेज किरणों में समाती !! क्रोध को शांत करने वाली, मीठे बोल सिखाने वाली !! मन की मालक मन भाती हो, चंद्र घंटा तुम वरदाती हो !! सुंदर भाव को लाने वाली, हर संकट मे बचाने वाली !! हर बुधवार जो तुझे ध्याये, श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं !! मूर्ति चंद्र आकार बनाएं, सन्मुख घी की ज्योत जलाएं !! शीश झुका कहे मन की बाता, पूर्ण आस करो जगदाता !! कांची पुर स्थान तुम्हारा, करनाटिका में मान तुम्हारा। नाम तेरा रटू महारानी, भक्त की रक्षा करो भवानी।

जब नवरात्रि प्रारम्भ होता है तब तीसरे दिन चंद्रघंटा माता की आरती और पूजा किया जाता है। माता के मस्तक पर घंटे के आकर में अर्धचंद्र बना है इसी कारण इनको चंद्रघंटा माता के नाम से पुकारा जाता है। Chandraghanta Mata ki Aarti का अर्थ केवल धार्मिक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह भक्त और देवी के … Read more

Gaytri Mata Aarti | गायत्री माता आरती : जीवन मरण से मुक्ति

gayatri mata aarti

जिस प्रकार वेदों में गायत्री मंत्र को उत्तम माना गया है उसी प्रकार गायत्री माता आरती को भी सर्वाधिक उत्तम माना गया है। आरती और शंख नाद करने से घर का वातावरण शांत और खुशनुमा बन जाता है।  Gaytri mata aarti के फलस्वरूप से मनुष्यों को धर्म, अर्थ, काम मोक्ष से मुक्ति मिलती है। प्राचीन … Read more

दुर्गा माँ की आरती | Durga Maa Ki Aarti : सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति

Durga Maa ki Aarti जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को ! उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै ! रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी ! सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ! कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती ! धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ! मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी ! आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ ! बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ! भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी ! मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ! श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥ श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै ! कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै !! ॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

दुर्गा माँ की आरती आप प्रतिदिन कर सकते हैं, वही नवरात्रि में सुबह और शाम दोनों समय कर सकते हैं। Durga maa ki aarti करने वाले और आरती में शामिल होने वाले सभी को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होता है। Durga mata ki aarti करने से हमें जीवन में सफलता प्राप्त होती है तथा उनकी कृपा … Read more

Shailputri Mata Aarti | शैलपुत्री माता की आरती : माँ दुर्गा की पहली शक्ति

Shailputri Mata Aarti Lyrics शैलपुत्री मां बैल असवार... करें देवता जय जयकार॥ शिव शंकर की प्रिय भवानी... तेरी महिमा किसी ने ना जानी॥ पार्वती तू उमा कहलावे... जो तुझे सिमरे सो सुख पावे॥ ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू... दया करे धनवान करे तू॥ सोमवार को शिव संग प्यारी... आरती तेरी जिसने उतारी॥ उसकी सगरी आस पुजा दो... सगरे दुख तकलीफ मिला दो॥ घी का सुंदर दीप जला के... गोला गरी का भोग लगा के॥ श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं... प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं॥ जय गिरिराज किशोरी अंबे... शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे॥ मनोकामना पूर्ण कर दो... भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो॥

शैलपुत्री माता की आरती देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप को समर्पित एक भक्तिपूर्ण स्तुति है। शैलपुत्री, जिनका नाम ‘पर्वत की पुत्री’ के अर्थ को प्रकट करता है, हिमालय की बेटी और देवी शक्ति का अवतार मानी जाती हैं। नवरात्रि के पहले दिन, उन्हें श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा जाता है। Shailputri Mata Aarti न … Read more

Brahmacharini Mata ki Aarti | ब्रह्मचारिणी माता की आरती : मन की शांति

Brahmacharini Mata ki Aarti Lyrics जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता... जय चतुरानन प्रिय सुख दाता ॥ ब्रह्मा जी के मन भाती हो... ज्ञान सभी को सिखलाती हो ॥ ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा... जिसको जपे सकल संसारा॥ जय गायत्री वेद की माता... जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता॥ कमी कोई रहने न पाए... कोई भी दुख सहने न पाए॥ उसकी विरति रहे ठिकाने... जो ​तेरी महिमा को जाने॥ रुद्राक्ष की माला ले कर... जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर॥ आलस छोड़ करे गुणगाना... मां तुम उसको सुख पहुंचाना॥ ब्रह्माचारिणी तेरो नाम... पूर्ण करो सब मेरे काम॥ भक्त तेरे चरणों का पुजारी... रखना लाज मेरी महतारी॥

माँ ब्रह्मचारिणी, दुर्गा माँ की नौ शक्तियों में से दूसरी शक्ति और स्वरूप हैं। ब्रह्मचारिणी माता की आरती और पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन किया जाता है। Brahmacharini Mata ki Aarti व पूजा करने से भक्तों के रुके सभी कार्य पूर्ण होते हैं, सभी दोषों से मुक्ति मिलती है, आप का शारीरिक स्वास्थ्य और मन की … Read more