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भक्तों के खातिर मईया धरती है रुप हजार

माँ दुर्गा की महिमा अनंत है, और जब भी भक्तों पर संकट आता है, वे अलग-अलग रूपों में प्रकट होकर उनकी रक्षा करती हैं। भक्तों के खातिर मईया धरती है रुप हजार भजन माँ की इसी अपार करुणा और दिव्य शक्ति का गुणगान करता है। माँ कभी काली बनकर राक्षसों का संहार करती हैं, तो कभी अन्नपूर्णा बनकर अपने भक्तों को आहार प्रदान करती हैं। यह भजन हमें माँ के विभिन्न रूपों से अवगत कराता है।

Bhakto Ke Khatir Maiya Dharti Hai Roop Hajar

भक्तों के खातिर मईया,
धरती है रुप हजार,
ना जाने किस रूप में,
हो जाये दीदार।1।

उसे पुकारो कोई नाम से,
माँ संकठा अम्बे रानी,
लक्ष्मी काली सरस्वती,
शेरा वाली या वरदानी,
माँ के चरणों से जिस दिन,
तेरा जुड़ जायेगा तार,
ना जाने किस रूप में,
हो जाये दीदार।2।

दया दृष्टि है सब पर माँ की,
यह विश्वास हमारा है,
पर कितनी श्रद्धा भक्ति से,
माँ का नाम उचारा है,
तेरी विनती वो सुन लेगी,
तेरा भर देगी भण्डार,
ना जाने किस रूप में,
हो जाये दीदार।3।

महिमा अपरम्पार है माँ की,
देव दनुज सबने ध्याया,
‘परशुराम’ क्या शक्ति बिन कोई,
एक कदम है चल पाया,
तेरे जीवन की नैया की,
माँ ही है खेवनहार,
ना जाने किस रूप में,
हो जाये दीदार।4।

भक्तों के खातिर मईया,
धरती है रुप हजार,
ना जाने किस रूप में,
हो जाये दीदार।5।

“भक्तों के खातिर मईया धरती है रुप हजार” भजन माँ दुर्गा की दयालुता और उनके विभिन्न रूपों की महिमा को दर्शाता है। माँ हर युग में अपने भक्तों की सहायता के लिए अवतरित होती हैं, उनका प्यार और सुरक्षा कभी कम नहीं होती। इस भक्ति भावना को और अधिक गहराई से अनुभव करने के लिए “[माँ तेरी ममता निराली है]” जैसे भजन भी आत्मा को माँ की भक्ति में रंग देते हैं। माँ दुर्गा की कृपा हम सभी पर बनी रहे, जय माता दी! ????????

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