बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी भजन में भक्त बालाजी के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करते हैं। यह भजन विशेष रूप से सालासर बालाजी के दर्शन की इच्छा और उनकी कृपा की कामना करता है। भक्तों का विश्वास है कि बालाजी के कीर्तन में भाग लेने से उनकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।
Balasa Mhara Kirtan Me Aavo Ji
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी।
एक बार थे आजावो,
म्हे ढोक लगावा जी।।
म्हे मनमा थारी।
ज्योत जगावा जी,
भक्ति और शक्ति द्यो।
नही पल बिसरावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन मे आवो जी।
एक बार थे आजावो,
म्हे ढोक लगावा जी।।
चरणा री धुली।
इकबार पावा जी,
श्री राम के प्यारे।
भव से तर जावा जी,
बालासा म्हारा कीर्तन मे आवो जी।
एक बार थे आजावो,
म्हे ढोक लगावा जी।।
थारे ढोल नगाड़ा,
शंख बजावा जी।
इकबार थे आजावो,
थारी आरती गावा जी।
बालासा म्हारा कीर्तन मे आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे ढोक लगावा जी।।
सियाराम जी से,
म्हाने मिलावो जी।
भक्ता के संग मिलकर,
नाचा और गावा जी।
बालासा म्हारा कीर्तन मे आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे ढोक लगावा जी।।
घर घर में थारो,
नाम जपावा जी।
म्हारे हिवड़े बस जावो,
म्हे आस लगावा जी।
बालासा म्हारा कीर्तन मे आवो जी,
एक बार थे आजावो,
म्हे ढोक लगावा जी।।
बालासा म्हारा कीर्तन में आवो जी।
एक बार थे आजावो,
म्हे ढोक लगावा जी।।
भजन का समापन भक्तों को यह समझाता है कि जब हम बालाजी के कीर्तन में सम्मिलित होते हैं और उनके नाम का जाप करते हैं, तो हमारी सभी समस्याएं और परेशानियाँ समाप्त हो जाती हैं। सालासर बालाजी की शरण में जाकर भक्त अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं। इस भजन के माध्यम से हमें यह संदेश मिलता है कि बालाजी की कृपा से हमें हर संकट से मुक्ति मिलती है, और उनका कीर्तन हमें हमेशा सही दिशा में अग्रसर करता है। जब हम सच्चे मन से बालाजी की पूजा करते हैं, तो वे हमारे जीवन में अनगिनत आशीर्वाद और सुखों का वास करते हैं।