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बाबा श्याम के दरबार मची रे होली

जब फाल्गुन का महीना आता है, तो खाटू नगरी में भक्तों का उत्साह और उमंग चरम पर होता है। बाबा श्याम के दरबार मची रे होली भजन उसी दिव्य आनंद को व्यक्त करता है, जब श्याम प्रेमी उनके दरबार में रंगों की होली खेलते हैं और भक्ति के रंग में रंग जाते हैं। यह भजन हमें श्याम बाबा की भक्ति में डूबने और उनकी अलौकिक कृपा को अनुभव करने के लिए आमंत्रित करता है।

Baba Shyam Ke Darbar Machi Re Holi

बाबा श्याम के दरबार में मची है होली बाबा श्याम के,
नंदलाल के दरबार मची है होली नंदलाल के….

के मन लाल गुलाल उड़ता है,
के मन केसर कस्तूरी बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार में मची है होली….

सो मन लाल गुलाल उड़त है,
दश मन केसर कस्तूरी बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार में मची है होली….

कितने बरस के कुवर कन्हैया,
कितने बरस की है राधा गोरी बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार में मची है होली….

8 बरस के कुमार कन्हैया,
16 बरस की है राधा गोरी बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार में मची है होली….

कौन गांव के हैं कुमर कन्हैया,
कौन गांव में की है राधा गोरी बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार में मची है होली….

नंद गांव मुकेश कुमर कन्हैया,
बरसाने की राधा गोरी बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार में मची है होली

खाटू श्याम जी की होली केवल रंगों की नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और श्रद्धा के रंगों से सराबोर होती है। यह भजन हमें बाबा के प्रेम में डूबने और उनकी कृपा को अनुभव करने का सुअवसर देता है। आप “छा गया है रंग बसंती फाल्गुन मेला आया है”, “खाटू वाले का दरबार निराला है”, “श्याम नाम लेता जाओ” और “तेरी रे मर्जी खाटू वाले” जैसे अन्य भजनों को पढ़कर अपनी भक्ति को और अधिक गहरा कर सकते हैं। जय श्री श्याम!

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