गुरु ही वह दिव्य प्रकाश हैं, जो हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य और मोक्ष के मार्ग पर ले जाते हैं। यदि इस संसार में गुरु का अस्तित्व न होता, तो जीवन दिशाहीन और भटकाव से भरा होता। “अगर इस जहाँ में कोई गुरु ही ना होता” भजन इसी गहरे भाव को व्यक्त करता है कि गुरु के बिना जीवन अधूरा है और उनकी कृपा से ही हम सही राह पर चल पाते हैं। आइए, इस भजन के माध्यम से गुरु महिमा का गुणगान करें और उनके प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करें।
Ager Es Jaha Me Koi Guru Hi Na Hota
कोई काम दुनिया में,
शुरू ही ना होता,
अगर इस जहाँ में,
कोई गुरु ही ना होता,
अगर इस जहां में,
कोई गुरु ही ना होता।।
गीता रामायण ने समझा दिया है,
सभी सार धर्मो का इसमें लिखा है,
गुरु ब्रम्हा विष्णु गुरु शिव होता,
गुरु ब्रम्हा विष्णु गुरु शिव होता,
अगर इस जहां में,
कोई गुरु ही ना होता।।
प्रभु राम ने गुरु की महिमा को जाना,
तभी विश्वामित्र और वशिष्ठजी को माना,
माने जो गुरु को उसे दुःख ना होता,
माने जो गुरु को उसे दुःख ना होता,
अगर इस जहां में,
कोई गुरु ही ना होता।।
सीता को गुरु मिली सती अनुसुइया,
दिया ज्ञान भक्ति का कुटिया में मैया,
पति की करो सेवा तो बड़ा सुख होता,
पति की करो सेवा तो बड़ा सुख होता,
अगर इस जहां में,
कोई गुरु ही ना होता।।
कोई काम दुनिया में,
शुरू ही ना होता,
अगर इस जहाँ में,
कोई गुरु ही ना होता,
अगर इस जहां में,
कोई गुरु ही ना होता।।
गुरु ही हमारे सच्चे मार्गदर्शक और रक्षक हैं। “अगर इस जहाँ में कोई गुरु ही ना होता” भजन हमें यह अहसास कराता है कि गुरु बिना यह संसार अंधकारमय होता। ऐसे ही अन्य भक्तिपूर्ण भजनों जैसे “गुरु चरणों की महिमा अपार”, “गुरु बिना जीवन अधूरा”, “गुरु वाणी का प्रकाश”, और “गुरु कृपा से जीवन सफल” को पढ़ें और अपने जीवन को गुरु भक्ति से प्रकाशित करें। ????