नवरात्रि का शुभ समय भक्तों के लिए माँ की भक्ति में डूबने और उनके जगरातों में श्रद्धा भाव से शामिल होने का होता है। आये हैं दिन नवरातों के, मेरी मैया के जगरातों के भजन माँ की आराधना के उसी भक्तिमय वातावरण को जीवंत करता है, जहाँ देवी भक्त माँ के गुणगान में लीन होकर रात-रात भर कीर्तन करते हैं। माँ के दरबार की रोशनी और भक्तों की आस्था का यह संगम, नवरात्रि को और भी दिव्य बना देता है। आइए, इस भजन के साथ माँ की भक्ति में सराबोर हों।
Aaye Hai Dina Navrato Ke Meri Maiya Ke Jagrato Ke
आये है दिन नवरातों के,
मेरी मैया के जगरातों के,
जिस घर में माँ की,
ज्योत जगाई जाती है,
माँ नवरातों में,
धन बरसाने आती है।1।
तू खर्चा कर नवरातों में,
तू खर्चा कर जगरातों पे,
फिर देख तू माँ कैसे,
तक़दीर बनाती है,
माँ नवरातों में,
धन बरसाने आती है।2।
जिस घर में होते नौरातें,
वहां माँ के पैर है पड़ जाते,
उस घर की लुगाई,
सेठानी कहलाती है,
माँ नवरातों में,
धन बरसाने आती है।3।
जब देती माँ देती जाए,
लाखों के करोडों बन जाए,
महंगी चीजें सस्ती लगने,
लग जाती है,
माँ नवरातों में,
धन बरसाने आती है।4।
तेरी किस्मत बंद है ताले में,
और चाबी माँ के हवाले में,
कहता है ‘पवन’,
मैया वो चाबी घुमाती है,
माँ नवरातों में,
धन बरसाने आती है।5।
आये है दिन नवरातों के,
मेरी मैया के जगरातों के,
जिस घर में माँ की,
ज्योत जगाई जाती है,
माँ नवरातों में,
धन बरसाने आती है।6।
माँ की महिमा अपार है, और नवरात्रि के ये पावन दिन भक्तों के लिए माँ के चरणों में भक्ति अर्पित करने का अमूल्य अवसर होते हैं। “आये हैं दिन नवरातों के, मेरी मैया के जगरातों के” भजन माँ के उसी भक्तिपूर्ण माहौल को सजीव करता है। यदि यह भजन आपके मन को माँ की भक्ति से भर देता है, तो “इतनी कृपा मैया जी बनाए रखना” भजन भी अवश्य पढ़े, जिसमें भक्त माँ से अपनी कृपा दृष्टि सदा बनाए रखने की प्रार्थना करता है।