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आओ आओ म्हारी दादीजी थे आंगण मं

आओ आओ म्हारी दादीजी थे आंगण मं यह भजन एक प्रेम और श्रद्धा से भरा हुआ है, जो विशेष रूप से दादी माँ के प्रति आस्था और स्नेह को प्रकट करता है। इस भजन में भक्त अपनी दादी माँ को घर के आंगन में बुलाते हैं, जहां उनकी उपस्थिति से घर का माहौल पवित्र और सुखद हो जाता है। यह भजन न केवल दादी की महानता को व्यक्त करता है, बल्कि उनके आशीर्वाद से जीवन में आने वाली खुशियों का भी प्रतीक है।

Aao Aao Mhari Dadiji The Aangan Me

आओ आओ म्हारी दादीजी,
थे आंगण मं,
थाने म्हें उडिका मैया जागण मं।।

कीर्तन की रात मैया,
बेगा बेगा आओ,
टाबरिया बुलावे मैया,
बेगा बेगा आओ,
कांई लागै है जी,
कांई लागै है जी,
मैया थारें आवण मं,
रातां म्हे जगावा थारी जागण में।।

ढोल नगाड़ा मैया,
मंजीरा बजावां,
मीठा मीठा दादी थाने,
भजन सुनावां,
दादी टाबरिया,
दादी टाबरिया,
नाचे है थारें आंगण मं,
रातां म्हे जगावा थारी जागण में।।

लाल चुनरिया मैया,
थाने उढावा,
चांदी रो मैया थारें,
छत्र लगावा,
म्हें तो फुला स्युं,
म्हें तो फुला स्युं,
सजायो थारें आंगण नं,
रातां म्हे जगावा थारी जागण में।।

“केशव” केवै मैया म्हारी,
अरज सुनिज्यो,
चरणां री चाकरी थे,
म्हानै भी दिज्यो,
म्हाने लाज कोनी,
म्हाने लाज कोनी,
आवे थांसु मांगण मं,
रातां म्हे जगावा थारी जागण में।।

आओ आओ म्हारी दादीजी,
थे आंगण मं,
थाने म्हें उडिका मैया जागण मं।।

“आओ आओ म्हारी दादीजी थे आंगण मं” भजन में दादी माँ के आशीर्वाद और उनकी कृपा को स्वीकारने की भावना है। जैसे “दादी के आशीर्वाद”, “दादी के आंगन की छांव”, और “दादी की ममता” जैसे भजन दादी माँ की महिमा को प्रकट करते हैं, वैसे ही यह भजन भी दादी माँ की उपस्थिति को सुख-शांति और समृद्धि का स्रोत मानता है। दादी माँ का आशीर्वाद हमारी जिंदगी को संपूर्ण बनाता है और हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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