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बैगा चलो रे बाबा को बुलाओ खाटू से आयो रे

भक्तों, जब मन में व्याकुलता होती है और हृदय केवल बाबा श्याम के दर्शन की लालसा रखता है, तब भक्त अपने प्रिय श्याम को बुलाने लगते हैं। बाबा अपने भक्तों की पुकार पर अवश्य आते हैं, क्योंकि वे अपने प्रेमियों की पुकार कभी अनसुनी नहीं करते। आज हम जिस भजन बैगा चलो रे बाबा को बुलाओ खाटू से आयो रे की चर्चा कर रहे हैं, वह भक्तों की गहरी आस और श्रद्धा से भरी विनती को दर्शाता है।

Baiga Chalo Re Baba Ko Bulao Khatu Se Aayo Re

बैगा चलो रे, बाबा को बुलाओ,
खाटू से आयो रे,।
बैगा चलो रे।

बैगा चलो, बैगा चलो
पैदल चलो रे, बैगा चलो रे।

फागुन के मेला के माही।
श्याम धणी बुलावे रे।
श्याम धणी भागता ने,
झालो देर बुलावे रे।।
बैगा चलो…

रींगस से जो ,पैदल जावेऊके।
बाबो सागे चाले रे।
आगे आगे श्याम धणी चाले
भग्त ये पाछे रे।।
बैगा चलो…

जो भी जावे ,श्याम धणी के।
वो खाली नही आवे रे।
श्याम धणी बाबो ,सबका मन की
पूरी कर देवेरे।।
बैगा चलो…

श्याम धणी बाबो,खाटू में,
दरबार लगा के बेठियो रे
भागता री किस्मत रो तालो।
बडा प्यार से खोले रे।
बैगा चलो…

राजा खाटू नगरी को बाबो,
जगत सेठ कहलावे रे।
जांगिड़ यो सबकी खाली,
झोली भर देवे रे।
बैगा चलो रे…

श्याम बाबा अपने भक्तों के प्रेम और भक्ति से बंधकर दौड़े चले आते हैं, वे हर आह्वान को सुनते हैं और अपने भक्तों को निराश नहीं करते। यह भजन हमें उनकी अपार दयालुता और भक्तवत्सलता का एहसास कराता है। ऐसे ही अन्य भजनों जैसे “बाबा को बुलाओ, खाटू से आयो रे”, “अब तो आजा श्याम”, “हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा”, और “बड़ी दूर से चलकर आया हूँ” को भी अवश्य करें और श्याम भक्ति में डूब जाएं।

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