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आल्हा की ध्वजा नहीं आई हो माँ भजन लिरिक्स

आल्हा की ध्वजा नहीं आई हो माँ एक ऐसा भजन है, जिसमें माँ दुर्गा की महिमा और शक्ति का वर्णन किया गया है। इस भजन में, यह दिखाया गया है कि माँ दुर्गा की उपस्थिति से हर संकट का समाधान संभव है, चाहे वह युद्ध हो या जीवन के अन्य कठिनाइयाँ। माँ के द्वारा रक्षात्मक शक्ति की ध्वजा लहराती है, जो भक्तों के मन को शांति और सुरक्षा प्रदान करती है।

Aalha Ki Dhwaja Nahi Aai Ho Maa Bhajan Lyrics

आल्हा की ध्वजा नहीं आई हो माँ,
तीन ध्वजा तीनो लोक से आई,
आल्हा की ध्वजा नही आईं हो माँ,
मैया आल्हा की ध्वजा नहीं आई हो माँ।।

जाओ जाओ मेरे बिरहा हो लँगूरवा,
आल्हा को पकड़ ले आओ हो माँ,
मैया आल्हा को पकड़ ले आओ हो माँ,
एक बनना खें दूजे बनना खें,
तीजे बन महोवा लोक हो माँ,
तीन ध्वजा तीनो लोक से आईं,
तीन ध्वजा तीनो लोक से आई,
आल्हा की ध्वजा नही आईं हो माँ।।

गाँव की पनिहारि से पूछे हो लँगूरवा,
आल्हा का पता बतलाओ हो माँ,
मैया आल्हा का पता बतलाओ हो माँ,
अरे बीच में होवे आल्हा को मकनवा,
वहीं पर टेर लगाए हो माँ,
तीन ध्वजा तीनो लोक से आई,
आल्हा की ध्वजा नही आईं हो माँ।।

आल्हा आल्हा खूब पुकारा,
आल्हा नदियों के घाट हो माँ,
मैया आल्हा नदियों के घाट हो माँ,
बांध लँगोटी आल्हा नहा रहे,
सरसों का तेल लगाए हो माँ,
तीन ध्वजा तीनो लोक से आई,
आल्हा की ध्वजा नही आईं हो माँ।।

पड़ी नजरिया जब आल्हा की,
मन में गयो घबराए हो माँ,
मैया मन में गयो घबराए हो माँ,
अरे कौन दिशा से आये हो लँगूरवा,
कौन संदेसा लाये हो माँ,
तीन ध्वजा तीनो लोक से आई,
आल्हा की ध्वजा नही आईं हो माँ।।

मैहर से हम आये हैं आल्हा
शारदा तुमको बुलाये हो माँ,
मैया शारदा तुमको बुलाये हो माँ,
अरे कैसे कैसे चले हैं लँगूरवा,
नहीं कछु हमारे पास हो माँ,
तीन ध्वजा तीनो लोक से आई,
आल्हा की ध्वजा नही आईं हो माँ।।

पान सुपारी ध्वजा नारियल,
लेहो बालक भेंट हो माँ,
मैया लेहो बालक भेंट हो माँ,
एक बनना खें दूजे बनना खें,
तीजे बन मैहर लोक हो माँ,
तीन ध्वजा तीनो लोक से आई,
आल्हा की ध्वजा नही आईं हो माँ।।

खोल किवड़िया दर्शन दे दो,
आल्हा खड़ो तेरो द्वार हो माँ,
मैया आल्हा खड़ो तेरो द्वार हो माँ,
मैया ने आल्हा को दर्शन दे दई,
आल्हा लौट आओ अपने लोक हो माँ,
तीन ध्वजा तीनो लोक से आई,
आल्हा की ध्वजा नही आईं हो माँ।।

तीन ध्वजा तीनो लोक से आई,
आल्हा की ध्वजा नहीं आई हो माँ,
मैया आल्हा की ध्वजा नहीं आई हो माँ।।

“आल्हा की ध्वजा नहीं आई हो माँ” भजन भक्तों को यह महसूस कराता है कि माँ दुर्गा की महिमा और शक्ति में कोई कमी नहीं है। जब तक माँ का आशीर्वाद हमारे साथ है, कोई भी संकट या कठिनाई हमें हरा नहीं सकती। यह भजन माँ की रक्षात्मक शक्तियों का चित्रण करता है और हमें विश्वास दिलाता है कि वह हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। यदि आपको यह भजन पसंद आया, तो अन्य भजनों का भी आनंद लें जैसे “जय माँ दुर्गा”, “शेरावाली माँ”, और “माँ दुर्गा की महिमा”। माँ दुर्गा की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। जय माँ दुर्गा!

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