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मैं मछली तुम नीर – चित्र विचित्र गुरुदेव भजन लिरिक्स

भक्त और गुरुदेव के बीच का संबंध बिल्कुल मछली और पानी जैसा होता है अटूट, अविभाज्य और संपूर्ण समर्पण से भरा। “मैं मछली तुम नीर चित्र विचित्र गुरुदेव” भजन इसी गहरी भक्ति को प्रकट करता है, जहाँ भक्त अपने गुरु को जीवन का आधार मानते हुए उनकी कृपा की याचना करता है।

Mai Machhali Tum Nir

श्लोक
नमो नमो जय श्री वृन्दावन,
रस बरसत घनघोर,
नमो नमो जय कुञ्ज महल नित,
नमो नमो प्रीतम चित चोर,
नमो नमो श्री कुञ्ज बिहारिन,
नमो नमो जय श्री हरिदासी,
नमो नमो यह इनकी जोरी।।

मैं मछलि तुम नीर,
गुरुवर मैं मछली तुम निर,
मै मछली तुम नीर,
सतगुरु मै मछली तुम नीर,
मै मछली तुम नीर।।

श्री गुरु प्राण संजीवन मेरे,
श्री गुरु प्राण संजीवन मेरे,
इन बिन नहीं शरीर,
मैं मछलि तुम नीर,
सतगुरु मै मछली तुम निर,
मै मछली तुम नीर।

कर दो कृपा गुरुदेव मेरे,
कर दो कृपा गुरुदेव मेरे,
कर दो कृपा गुरुदेव।

\गुरु ही पिलावे प्रेम का प्याला,
गुरु ही पिलावे प्रेम का प्याला,
बदल जाए तक़दीर,
मैं मछलि तुम नीर,
सतगुरु मै मछली तुम नीर,
मै मछली तुम निर।।

कर दो कृपा गुरुदेव मेरे,
कर दो कृपा गुरुदेव मेरे,
कर दो कृपा गुरुदेव।

श्री गुरु वृंदा विपिन बसावे,
श्री गुरु वृंदा विपिन बसावे,
पागल मन धर धीर,
मैं मछलि तुम नीर,
सतगुरु मैं मछली तुम नीर,
मै मछली तुम नीर।।

कर दो कृपा गुरुदेव मेरे,
कर दो कृपा गुरुदेव मेरे,
कर दो कृपा गुरुदेव।

मै मछली तुम नीर,
गुरुवर मैं मछली तुम नीर,
मैं मछलि तुम निर,
सतगुरु मैं मछली तुम निर,
मैं मछलि तुम निर।।

गुरुदेव की कृपा के बिना जीवन अधूरा है, और उनकी शरण में आने से ही आत्मा को शांति मिलती है। अगर यह भजन आपको भक्ति के भाव से भर गया, तो “गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना”, “तेरी महिमा को न जानूँ मैं गुरुदेव”, “गुरुदेव मेरे दाता मुझको ऐसा वर दो”, और “बार बार अरदास करूँ मैं सतगुरु जी सरकार” भी अवश्य पढ़ें।









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