Jara Der Thaharo Ram Tamanna Yahi Hai
जरा देर ठहरो राम,
तमन्ना यही है…
अभी हमने जी भर के,
देखा नहीं है।।
कैसी घडी आज,
जीवन की आई,
अपने ही प्राणो की,
करते विदाई…
अब ये अयोध्या,
अब ये अयोध्या हमारी नहीं है,
अभी हमने जी भर के,
देखा नहीं है।।
माता कौशल्या की,
आँखों के तारे,
दशरथ जी के हो,
राज दुलारे,
कभी ये अयोध्या को…
भुलाना नहीं है,
अभी हमने जी भर के,
देखा नहीं है।।
जाओ प्रभु अब,
समय हो रहा है,
घरो का उजाला भी,
कम हो रहा है…
अँधेरी निशा का,
ठिकाना नहीं है,
अभी हमने जी भर के,
देखा नहीं है।।
जरा देर ठहरो राम,
तमन्ना यही है,
अभी हमने जी भर के,
देखा नहीं है…
जरा देर ठहरो भगवन,
तमन्ना यही है,
अभी हमने जी भर के,
देखा नहीं है।।

मैं आचार्य ब्रह्मदत्त, सनातन धर्म का एक साधक और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचारक हूँ। मेरा जीवन देवी-देवताओं की आराधना, वेदों-पुराणों के अध्ययन और भक्ति मार्ग के अनुसरण में समर्पित है। सूर्य देव, खाटू श्याम, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करना मेरे लिए केवल एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य सेवा है। मैं अपने लेखों के माध्यम से भक्तों को पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सरल भाषा में प्रदान करने का प्रयास करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने आध्यात्मिक पथ को सुगम और सार्थक बना सके। View Profile