एक तमन्ना जीवन की मै दर्शन तेरे पा जाऊँ भजन लिरिक्स

एक तमन्ना जीवन की, मैं दर्शन तेरे पा जाऊँ भजन एक आस्था और भक्ति का प्रतीक है, जिसमें भक्‍त अपनी पूरी श्रद्धा और प्रेम के साथ भगवान से उनके दिव्य दर्शन की इच्छा करता है। यह भजन हमें यह संदेश देता है कि जीवन का असली सुख तब है जब हम अपने प्रभु के दर्शन पा लें और उनका आशीर्वाद हमें मिलता रहे।

Ek Tamanna Jeevan Ki Mai Darshan Tere Paa Jaun

एक तमन्ना जीवन की मैँ दर्शन तेरे पा जाऊँ।
मेरी लगन कम न होगी चाहे कितने ही कष्ट पाऊँ,
बाबा दर पे तेरे आऊँ, हर पल तेरे गुण गाऊँ॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

मैँ भटका जीवन सागर मेँ बजंरग तुझको भुलाया।
जब सूझा नहीँ किनारा तो मुझे ध्यान तेरा आया,
अब शरण तेरी आया, करो बाबा सिर पे छाया,
एहसान तुम्हारा हनुमत जन्म जन्म न भुला पाऊँ॥1॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

मैँ हूँ अनाथ तुम दीनानाथ हे सालासर वाले।
तेरा सानी ना जग मेँ हैँ तेरे खेल निराले,
तेरी जो एक नजर हो जाये, तो जिन्दगी संवर जाये,
तेरे सिवा नहीँ कोई हमारा जाकर के किसे सुनाऊँ॥2॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

लेकर परिवार अपना मैँ सालासर मेँ आऊँगा।
घृत, सिन्दूर, नारियल की बाबा के भेँट चढ़ाऊँगा,
लाल ध्वजा दर पे चढ़ायेँ, बाबा की जैकार लगायेँ,
लड्डू पेड़ा खीर चूरमा का तुमको भोग लगाऊँ॥3॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

सुधि सबकी लेने वाले ‘खेदड़’ की भी खबर ले ले।
धन माल नहीँ चाहते हम बस भक्ति अपनी दे दे,
एक बार हमपे नजर डालो, दास अपना हमेँ बनालो,
बनके सेवक चरणोँ का दर पे तेरे रह जाऊँ॥4॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

एक तमन्ना जीवन की मैँ दर्शन तेरे पा जाऊँ।
मेरी लगन कम न होगी चाहे कितने ही कष्ट पाऊँ,
बाबा दर पे तेरे आऊँ, हर पल तेरे गुण गाऊँ॥
एक तमन्ना …


एक तमन्ना जीवन की मैँ दर्शन तेरे पा जाऊँ।
मेरी लगन कम न होगी चाहे कितने ही कष्ट पाऊँ,
बाबा दर पे तेरे आऊँ, हर पल तेरे गुण गाऊँ॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

मैँ भटका जीवन सागर मेँ बजंरग तुझको भुलाया।
जब सूझा नहीँ किनारा तो मुझे ध्यान तेरा आया,
अब शरण तेरी आया, करो बाबा सिर पे छाया,
एहसान तुम्हारा हनुमत जन्म जन्म न भुला पाऊँ॥1॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

मैँ हूँ अनाथ तुम दीनानाथ हे सालासर वाले।
तेरा सानी ना जग मेँ हैँ तेरे खेल निराले,
तेरी जो एक नजर हो जाये, तो जिन्दगी संवर जाये,
तेरे सिवा नहीँ कोई हमारा जाकर के किसे सुनाऊँ॥2॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

लेकर परिवार अपना मैँ सालासर मेँ आऊँगा।
घृत, सिन्दूर, नारियल की बाबा के भेँट चढ़ाऊँगा,
लाल ध्वजा दर पे चढ़ायेँ, बाबा की जैकार लगायेँ,
लड्डू पेड़ा खीर चूरमा का तुमको भोग लगाऊँ॥3॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

सुधि सबकी लेने वाले ‘खेदड़’ की भी खबर ले ले।
धन माल नहीँ चाहते हम बस भक्ति अपनी दे दे,
एक बार हमपे नजर डालो, दास अपना हमेँ बनालो,
बनके सेवक चरणोँ का दर पे तेरे रह जाऊँ॥4॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

एक तमन्ना जीवन की मैँ दर्शन तेरे पा जाऊँ।
मेरी लगन कम न होगी चाहे कितने ही कष्ट पाऊँ,
बाबा दर पे तेरे आऊँ, हर पल तेरे गुण गाऊँ॥
एक तमन्ना …

एक तमन्ना जीवन की मैँ दर्शन तेरे पा जाऊँ।
मेरी लगन कम न होगी चाहे कितने ही कष्ट पाऊँ,
बाबा दर पे तेरे आऊँ, हर पल तेरे गुण गाऊँ॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

मैँ भटका जीवन सागर मेँ बजंरग तुझको भुलाया।
जब सूझा नहीँ किनारा तो मुझे ध्यान तेरा आया,
अब शरण तेरी आया, करो बाबा सिर पे छाया,
एहसान तुम्हारा हनुमत जन्म जन्म न भुला पाऊँ॥1॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

मैँ हूँ अनाथ तुम दीनानाथ हे सालासर वाले।
तेरा सानी ना जग मेँ हैँ तेरे खेल निराले,
तेरी जो एक नजर हो जाये, तो जिन्दगी संवर जाये,
तेरे सिवा नहीँ कोई हमारा जाकर के किसे सुनाऊँ॥2॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

लेकर परिवार अपना मैँ सालासर मेँ आऊँगा।
घृत, सिन्दूर, नारियल की बाबा के भेँट चढ़ाऊँगा,
लाल ध्वजा दर पे चढ़ायेँ, बाबा की जैकार लगायेँ,
लड्डू पेड़ा खीर चूरमा का तुमको भोग लगाऊँ॥3॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

सुधि सबकी लेने वाले ‘खेदड़’ की भी खबर ले ले।
धन माल नहीँ चाहते हम बस भक्ति अपनी दे दे,
एक बार हमपे नजर डालो, दास अपना हमेँ बनालो,
बनके सेवक चरणोँ का दर पे तेरे रह जाऊँ॥4॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

एक तमन्ना जीवन की मैँ दर्शन तेरे पा जाऊँ।
मेरी लगन कम न होगी चाहे कितने ही कष्ट पाऊँ,
बाबा दर पे तेरे आऊँ, हर पल तेरे गुण गाऊँ॥
एक तमन्ना …

एक तमन्ना जीवन की मैँ दर्शन तेरे पा जाऊँ।
मेरी लगन कम न होगी चाहे कितने ही कष्ट पाऊँ,
बाबा दर पे तेरे आऊँ, हर पल तेरे गुण गाऊँ॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

मैँ भटका जीवन सागर मेँ बजंरग तुझको भुलाया।
जब सूझा नहीँ किनारा तो मुझे ध्यान तेरा आया,
अब शरण तेरी आया, करो बाबा सिर पे छाया,
एहसान तुम्हारा हनुमत जन्म जन्म न भुला पाऊँ॥1॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

मैँ हूँ अनाथ तुम दीनानाथ हे सालासर वाले।
तेरा सानी ना जग मेँ हैँ तेरे खेल निराले,
तेरी जो एक नजर हो जाये, तो जिन्दगी संवर जाये,
तेरे सिवा नहीँ कोई हमारा जाकर के किसे सुनाऊँ॥2॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

लेकर परिवार अपना मैँ सालासर मेँ आऊँगा।
घृत, सिन्दूर, नारियल की बाबा के भेँट चढ़ाऊँगा,
लाल ध्वजा दर पे चढ़ायेँ, बाबा की जैकार लगायेँ,
लड्डू पेड़ा खीर चूरमा का तुमको भोग लगाऊँ॥3॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

सुधि सबकी लेने वाले ‘खेदड़’ की भी खबर ले ले।
धन माल नहीँ चाहते हम बस भक्ति अपनी दे दे,
एक बार हमपे नजर डालो, दास अपना हमेँ बनालो,
बनके सेवक चरणोँ का दर पे तेरे रह जाऊँ॥4॥
एक तमन्ना … बाबा दर …

एक तमन्ना जीवन की मैँ दर्शन तेरे पा जाऊँ।
मेरी लगन कम न होगी चाहे कितने ही कष्ट पाऊँ,
बाबा दर पे तेरे आऊँ, हर पल तेरे गुण गाऊँ॥
एक तमन्ना …

इस भजन के माध्यम से, हम भगवान के प्रति अपनी आस्था और प्रेम को प्रकट करते हैं। जैसे एक तमन्ना जीवन की में भक्‍त का केवल एक ही सपना है कि वह भगवान के दर्शन कर सके और उनके साथ अपना जीवन व्यतीत कर सके। भगवान के दर्शन से जो आनंद मिलता है, वह संसार की किसी भी भौतिक सुख से कहीं अधिक होता है। इसी भजन में हम देखते हैं कि भगवान की कृपा और दर्शन से हमारा जीवन धन्य और समृद्ध हो जाता है।

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