चीर दिया सीना, सियाराम नजर आए भजन हनुमान जी की अनन्य भक्ति और उनके अटूट प्रेम को दर्शाने वाला एक अद्भुत भक्तिगीत है। यह भजन उस महिमापूर्ण प्रसंग को जीवंत करता है जब भक्तों के संदेह को दूर करने के लिए हनुमान जी ने अपने सीने को चीरकर उसमें श्री राम और माता सीता के दिव्य दर्शन कराए थे। यह भजन न केवल उनकी अद्भुत श्रद्धा को दिखाता है, बल्कि हमें सिखाता है कि सच्चे भक्त के हृदय में सदैव भगवान का वास होता है।
Chir Diya Sina Siyaram Najar Aaye
भक्ति के रंग में रंगे,
हनुमान नज़र आये।
चीर दिया सीना,
सियाराम नजर आए।
भक्ति के रंग मे रंगे,
हनुमान नज़र आये।।
सुग्रीव के संग वन में,
हनुमान जी मिले थे।
मित्रता के फूल मन मे,
यही से ही खिले थे।
बने पक्के यार दोनों,
दुनिया मे अमर पाए।
चिर दिया सीना,
सियाराम नजर आए।
भक्ति के रंग मे रंगे,
हनुमान नज़र आये।।
लक्ष्मण को लगी शक्ति,
श्री राम जी घबराए।
और जा वेद सुषेण को,
लंका से उठा लाए।
वो पहाड़ उठा लाये,
महावीर यूँ कहलाये।
चिर दिया सीना,
सियाराम नजर आए।
भक्ति के रंग मे रंगे,
हनुमान नज़र आये।।
एक दिन माता सीता,
श्रृंगार कर रही थी।
मांग में वो अपने,
सिंदूर भर रही थी,
ये देख कर के हनुमत।
सिंदूर में नहाए,
चिर दिया सीना,
सियाराम नजर आए।
भक्ति के रंग मे रंगे,
हनुमान नज़र आये।।
भक्ति के रंग में रंगे,
हनुमान नज़र आये,
चीर दिया सीना।
सियाराम नजर आए,
भक्ति के रंग मे रंगे,
हनुमान नज़र आये।।
हनुमान जी की भक्ति और समर्पण अपने आप में एक मिसाल है, जो यह दर्शाता है कि प्रेम और भक्ति की पराकाष्ठा क्या होती है। चीर दिया सीना, सियाराम नजर आए भजन हमें यह संदेश देता है कि जब कोई भक्त सच्चे मन से भगवान को अपने हृदय में बसाता है, तो वह हर परिस्थिति में उनकी उपस्थिति का अनुभव कर सकता है।
इस भजन के माध्यम से हम हनुमान जी की निस्वार्थ भक्ति को नमन करते हैं और उनसे यही प्रार्थना करते हैं कि वे हमें भी ऐसा ही प्रेम और श्रद्धा प्रदान करें। जब भी जीवन में अंधकार छाए, हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि सच्चे मन से प्रभु को पुकारने पर वे अवश्य हमारे हृदय में प्रकट होते हैं। जय श्री राम! जय हनुमान!