दया की आस में भगवन तेरे दरबार आया हूँ भजन लिरिक्स

जब जीवन के हर मोड़ पर आशाएँ टूटने लगती हैं और दुनिया का सहारा भी अधूरा लगने लगता है, तब भक्त अपने प्रभु श्रीराम के दरबार में शरण लेने आता है। दया की आस में भगवन, तेरे दरबार आया हूँ भजन भक्त की विनम्र प्रार्थना और समर्पण को दर्शाता है। यह भजन हमें सिखाता है कि जब हम सच्चे हृदय से प्रभु को पुकारते हैं, तो उनकी कृपा अवश्य बरसती है। श्रीराम करुणा और दया के सागर हैं, जो अपने भक्तों की पुकार को कभी अनसुना नहीं करते।

Daya Ki Aas Mein Bhagwan Tere Darbar aaya hu

दया की आस में भगवन,
तेरे दरबार आया हूँ
बना लो दास मुझको भी,
बहुत लाचार आया हूँ
दया की आस मे भगवन,
तेरे दरबार आया हूँ।।

सुना हूँ तुम गरीबों के,
सदा उद्धार करते हो
सदा उद्धार करते हो,
तो हाजिर हूँ गरीबों के
स्वयं सरदार आया हूँ,
दया की आस मे भगवन,
तेरे दरबार आया हूँ।।

अगर तुम दीन के दाता,
तो मेरी दीनता सुन लो
तो मेरी दीनता सुन लो,
जगत के मोह में डूबा
मैं एक गुनेहगार आया हूँ,
दया की आस मे भगवन,
तेरे दरबार आया हूँ।।

है ‘सच्चिदानंद’ की विनती,
प्रभु स्वीकार कर लेना
प्रभु स्वीकार कर लेना,
सदा ‘धीरज’ को शरणागत
मिले सरकार आया हूँ,
दया की आस मे भगवन,
तेरे दरबार आया हूँ।।

दया की आस में भगवन,
तेरे दरबार आया हूँ
बना लो दास मुझको भी,
बहुत लाचार आया हूँ
दया की आस मे भगवन,
तेरे दरबार आया हूँ।।

प्रभु श्रीराम का दरबार हर दुखी हृदय के लिए शरणस्थली है, जहाँ केवल प्रेम, दया और करुणा की वर्षा होती है। दया की आस में भगवन, तेरे दरबार आया हूँ भजन हमें यह प्रेरणा देता है कि हर परिस्थिति में प्रभु राम का सहारा लेकर ही जीवन को सफल बनाया जा सकता है। प्रभु श्रीराम की इस अपार कृपा को और अधिक अनुभव करने के लिए राम नाम जप ले, एक यही संग जाई, राम से बड़ा राम का नाम, श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन, अगर राघव के चरणों में जगह थोड़ी सी मिल जाए भजनों को भी पढ़ें और श्रीराम की भक्ति में रम जाएं। जय श्रीराम! ????????

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