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शिव ही बसे है कण कण में केदार हो या काशी लिरिक्स

शिव ही बसे हैं कण-कण में, केदार हो या काशी — यह भजन महादेव की सर्वव्यापकता और उनकी अनंत कृपा का बखान करता है। शिव केवल किसी एक स्थान के नहीं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड के स्वामी हैं। चाहे केदारनाथ की ऊँची पहाड़ियाँ हों या काशी की पवित्र गलियाँ, हर जगह महादेव का वास है। आइए, इस भजन को पढ़ें और भगवान शिव की भक्ति में लीन हों।

Shiv Hi Base Hai Kar Kar Me Kedar Ho Ya Kashi

शिव ही बसे है कण कण में,
केदार हो या काशी,
द्वादश ज्योतिर्लिंग है,
हर दिशा में है कैलाशी,
शिव ही बसे हैं कण कण में,
केदार हो या काशी।1।

प्रभु राम भी करे है पूजा,
जिनकी रामेश्वर कहलाए,
कृष्ण प्रेम में नाचे भोले,
गोपेश्वर बन जाए,
अमलेश्वर घूमेश्वर शंकर,
भीमेश्वर अविनाशी,
द्वादश ज्योतिर्लिंग है,
हर दिशा में है कैलाशी,
शिव ही बसे हैं कण कण में,
केदार हो या काशी।2।

भस्म है ओढ़े देह पर महिमा,
महाकाल की भारी,
सोमनाथ मल्लिकार्जुन शंभू,
नागेश्वर त्रिपुरारी,
बैरागी जोगी है ऊंचे,
शिखरों का हैं वासी,
द्वादश ज्योतिर्लिंग है,
हर दिशा में है कैलाशी,
शिव ही बसे हैं कण कण में,
केदार हो या काशी।3।

चंद्र है सिर पे नाग गले में,
जटा में गंग समाए,
वैद्यनाथ भोले भंडारी,
डम डम डमरू बजाए,
त्रयंबकेश्वर शिव शंकर प्रभु,
राघव ये सुखराशि,
द्वादश ज्योतिर्लिंग है,
हर दिशा में है कैलाशी,
शिव ही बसे हैं कण कण में,
केदार हो या काशी।4।

शिव ही बसे है कण कण में,
केदार हो या काशी,
द्वादश ज्योतिर्लिंग है,
हर दिशा में है कैलाशी,
शिव ही बसे हैं कण कण में,
केदार हो या काशी।5।

महादेव न केवल केदारनाथ और काशी में, बल्कि हर जीव के हृदय में विराजमान हैं। जो सच्चे मन से उनका ध्यान करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। अगर यह भजन आपको शिवजी की महिमा से जोड़ रहा है, तो महाकाल के द्वार चले चलो, भोले तेरे भक्तों को तेरा ही सहारा है, जय हो बाबा विश्वनाथ जय हो भोले शंकर, और अब सबकुछ सम्भालो भोलेनाथ मैं आया तेरे चरणों में भी जरूर करें। ये भजन शिवजी की अनंत कृपा और भक्ति के प्रभाव को दर्शाते हैं। ????????✨

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