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तेरे दर्शन की अखियों को प्यास है

भक्त का हृदय तब तक संतुष्ट नहीं होता जब तक वह अपने आराध्य के दर्शन न कर ले। तेरे दर्शन की अखियों को प्यास है भजन उस भक्त की गहरी भावना को दर्शाता है, जो श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए तड़प रहा है। यह भजन हमारे अंदर प्रभु प्रेम की अग्नि को और अधिक प्रज्वलित करता है, जिससे मन में केवल कृष्ण की छवि ही बस जाती है और उनके दर्शन पाने की व्याकुलता बढ़ जाती है।

Tere Darshan Ki Akhiyon Ko Pyas Hai

कृष्ण कन्हैया सुनलो,
ये अरदास है,
तेरे दर्शन की,
अखियों को प्यास है।।1।।

जब से छोडी गोकुल नगरी,
छोड़ गयें कान्हा बरसाना,
छोड़ गयें कान्हा बरसाना,
बस तेरे आने की,
मन को आस है,
तेरे दरशन की,
अखियों को प्यास है।।2।।

घर घर जाकर माखन चुराते,
चिर गोपीयो के हर लाते,
चिर गोपीयो के हर लाते,
तेरे साथ बिताया,
हर पल खास है,
तेरे दरशन की,
अखियों को प्यास है।।3।।

भुल गये तुम मित्र सखा सब,
सुबल विशाल गरीब सुदामा,
सुबल विशाल गरीब सुदामा,
संग चोरी संग जोरी,
करना खास है,
तेरे दरशन की,
अखियों को प्यास है।।4।।

भुल गये तुम मात यसोदा,
नंद बाबा का प्यार पुराना,
नंद बाबा का प्यार पुराना,
मैया गईया,
यमुना जी को आस है,
तेरे दरशन की,
अखियों को प्यास है।।5।।

अब तो आजा ओ हरजाई,
‘देव’ तेरी महीमा लिख गाई,
‘देव’ तेरी महीमा लिख गाई,
भुल चुक ये,
माफ करो अरदास है,
तेरे दरशन की,
अखियों को प्यास है।।6।।

कृष्ण कन्हैया सुनलो,
ये अरदास है,
तेरे दर्शन की,
अखियों को प्यास है।।7।।

श्रीकृष्ण के दर्शन से बड़ा कोई सुख नहीं, क्योंकि उनकी एक झलक ही भक्तों के जीवन को पूर्ण कर देती है। ऐसे ही भजनों को पढ़ें और करें, जैसे वृन्दावन में मैं चला आया, जय जय हो प्यारे नंदलाल की जय बोलो गोपाल की, देखो नैना से जादू चलाए रयो है और मोहे लागी लगन राधा वल्लभ से, ताकि श्रीकृष्ण की भक्ति में आपकी आत्मा पूरी तरह लीन हो जाए। ????????

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