मेरे देश की धरती एक प्रसिद्ध और दिल को छू लेने वाला देशभक्ति गीत है, जो हमारे देश की मिट्टी और इसके प्राकृतिक सौंदर्य के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम को व्यक्त करता है। इसके शब्द हमें अपने देश की सेवा करने की प्रेरणा देते हैं, ताकि हम अपनी मिट्टी और संस्कृति को बचाकर रखें और इसे आगे बढ़ाएं। यह भजन हर भारतीय के दिल में देश के प्रति गर्व और समर्पण की भावना को जगाता है।
Mere Desh Ki Dharati Deshbhakti Geet Lyrics
मेरे देश की धरती सोना उगले,
उगले हीरे मोती,
मेरे देश की धरती।।1।।
बैलों के गले में जब घुँघरू,
जीवन का राग सुनाते हैं,
ग़म कोस दूर हो जाते है,
खुशियों के कमल मुस्काते हैं,
सुन के रहट की आवाज़ें,
यूँ लगे कहीं शहनाई बजे,
आते ही मस्त बहारों के,
दुल्हन की तरह हर खेत सजे।
मेरे देश की धरती सोना उगले,
उगले हीरे मोती,
मेरे देश की धरती।।2।।
जब चलते हैं इस धरती पर हल,
ममता अँगड़ाइयाँ लेती है,
क्यों ना पूजें इस माटी को,
जो जीवन का सुख देती है,
इस धरती पे जिसने जन्म लिया,
उसने ही पाया प्यार तेरा,
यहाँ अपना पराया कोई नही,
हैं सब पे है माँ उपकार तेरा।
मेरे देश की धरती सोना उगले,
उगले हीरे मोती,
मेरे देश की धरती।।3।।
ये बाग़ हैं गौतम नानक का,
खिलते हैं अमन के फूल यहाँ,
गांधी सुभाष टैगोर तिलक,
ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ,
रंग हरा हरिसिंह नलवे से,
रंग लाल है लाल बहादुर से,
रंग बना बसंती भगतसिंह,
रंग अमन का वीर जवाहर से।
मेरे देश की धरती सोना उगले,
उगले हीरे मोती,
मेरे देश की धरती।।4।।
गुरु देव जी के भजन हमें अपने देश के प्रति निष्ठा और समर्पण की भावना से प्रेरित करते हैं। मेरे देश की धरती जैसे भजन हमारे दिलों में अपने देश की मिट्टी और संस्कृति के प्रति श्रद्धा को प्रगाढ़ करते हैं। गुरु देव जी के अन्य भजन जैसे Insaf Ki Dagar Pe Bachche Dikhao Chalke, Nanha Munha Rahi Hu Desh ka Sipahi Hu – Deshbhakti Geet, Chhoro Kal Ki Baat Kal Ki Baat Purani – Deshbhakti Geet भी हमें अपने कर्तव्यों को सही तरीके से निभाने की प्रेरणा देते हैं। इन भजनों के माध्यम से हम अपने दिलों में देश के प्रति प्रेम और सम्मान को बढ़ा सकते हैं, ताकि हम अपने देश को समृद्ध और सशक्त बनाने में अपना योगदान दे सकें।