हे नाथ क्या ये विनती स्वीकार अब न होगी लिरिक्स

हे नाथ क्या ये विनती स्वीकार अब न होगी यह भजन श्रीराम के प्रति भक्त की गहरी आस्था और विनम्र प्रार्थना का प्रतिबिंब है। इस भजन में भक्त अपने दिल की गहरी भावनाओं को व्यक्त करते हुए श्रीराम से विनती करते हैं कि उनका आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहे। यह भजन एक भक्त के प्रेम और समर्पण का गहरा प्रतीक है।

Hey Nath Kya Ye Vinti Sweekar Ab Na Hogi

हे नाथ क्या ये विनती,
स्वीकार अब न होगी,
आश्रित पे अनुग्रह की,
भरमार अब न होगी।1।

पतितों के तारने के,
किस्से पड़े पुराने,
क्या एक नई कहानी,
तैयार अब न होगी,
हे नाथ क्या यें विनती,
स्वीकार अब न होगी।2।

गर है स्वभाव बदला,
तो साफ साफ कह दो,
हुई बार बार करूणा,
इस बार अब न होगी,
हे नाथ क्या यें विनती,
स्वीकार अब न होगी।3।

रहते थे जिसके बस में,
जो आपको था प्यारा,
उस प्रेम की भी शायद,
दरकार अब न होगी,
हे नाथ क्या यें विनती,
स्वीकार अब न होगी।4।

दुख दूर कर दो ताकि,
‘राजेश’ भी ये बोले,
एहसान मानता हूँ,
तकरार अब न होगी,
हे नाथ क्या यें विनती,
स्वीकार अब न होगी।5।

हे नाथ क्या ये विनती,
स्वीकार अब न होगी,
आश्रित पे अनुग्रह की,
भरमार अब न होगी।6।

हे नाथ क्या ये विनती स्वीकार अब न होगी भजन हमें श्रीराम की महिमा और उनकी करुणा की याद दिलाता है। श्रीराम के प्रति अपनी आस्था को प्रगट करते हुए भक्त उनके दरबार में अपनी पूरी श्रद्धा से स्वीकार्यता की उम्मीद करते हैं। इस भजन को श्रीराम के अन्य भजनों राम का नाम है प्यारा और सजी है अयोध्या नगरीया से जोड़ते हुए हम यह समझ सकते हैं कि श्रीराम की भक्ति में हर मुश्किल आसान हो जाती है। भक्त की यही सच्ची भक्ति हमें जीवन में उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। जय श्रीराम!

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