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कौन मेरी नैया पार उतारे

जीवन रूपी सागर में जब दुखों की लहरें उठती हैं, तब हम सभी किसी ऐसे सहारे की तलाश करते हैं जो हमें पार लगाए। भगवान विष्णु, जो जगत के पालनहार हैं, भक्तों की नैया को भवसागर से पार लगाने वाले हैं। आज हम इसी भाव को समर्पित एक सुंदर भजन कौन मेरी नैया पार उतारे का रसास्वादन करेंगे, जो हमें प्रभु के प्रति श्रद्धा और समर्पण की अनुभूति कराएगा। आइए, इस भक्तिमय भजन को पढ़कर अपने हृदय को श्रीहरि की भक्ति में डुबोते हैं।

Kaun Meri Naiya Par Utare

बिन तुम्हारे कौन उबारे
कौन नैया मेरी पार उतारे
कौन खेवे पतवार
मेरी नैया पड़ी मझधार
भटक गई नाव
खो गया है किनारा
कैसे संभलूं कोई ना सहारा
तुम जो आए ना तारणहार
कौन खेवे पतवार
मेरी नैया पड़ी मझधार
बिन तुम्हारे कौन उबारे…

बंधन में अपने जकड़ लिया है
मोह माया ने पकड़ लिया है
स्वयं का बुना जाल है
जीवन हुआ बेहाल है
कौन काटे बंधन इसके
सिवा तुम्हारे भरतार
कौन खेवे पतवार
मेरी नैया पड़ी मझधार
बिन तुम्हारे कौन उबारे…

अधम जान मुझे ना ठुकराओ
ठाकुर मेरे मुझे हृदय लगाओ
सुध बुध मेरी अब है लौटी
जिन्दगी रह गई बहुत ही छोटी
होगा क्या पछताने से राजीव
सब गंवाया तूने बेकार
कौन खेवे पतवार
मेरी नैया पड़ी मझधार
बिन तुम्हारे कौन उबारे…

अब भी है वक्त सम्भल जा
प्रभु की राह में निकल जा
बड़े दयालु हैं बड़े कृपालु
तुझे भी कर देंगें निहाल
जा शरण में उनकी चला जा
भाव भक्ति का मन में धार
कौन खेवे पतवार
मेरी नैया पड़ी मझधार
बिन तुम्हारे कौन उबारे…

भगवान विष्णु की कृपा से ही जीवन के कठिन मार्ग सुगम होते हैं, और उनकी भक्ति से ही आत्मा को शांति प्राप्त होती है। कौन मेरी नैया पार उतारे भजन हमें यह संदेश देता है कि श्रीहरि का आश्रय ही हमारा सच्चा संबल है। इसी भक्ति भाव को और गहराई से अनुभव करने के लिए आप “श्री हरि की महिमा अपार , संकट हरन श्री विष्णु जी , गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” और “नारायण, नारायण जय गोविंद हरे” जैसे अन्य दिव्य भजनों का भी पाठ करें और विष्णु जी की अनंत महिमा का गुणगान करें। ????????

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