Wah Re Jatadhari Tu To Rahta Shamshan Me
ना मंदिर में रहता ना रहता मकान में,
वाह रे जटाधारी तू तो रहता श्मशान में……
हीरे की माला ना फूलों की माला,
अपने गले में है सर्पों को डाला,
रहता फक्कड़ देव हमने देखा ना जहान में,
वाह रे जटाधारी तू तो रहता श्मशान में……
न तन पर है कुर्ता न तन पर है धोती,
सारे बदन पर है एक लंगोटी,
गंगा सिर पर ना होवे तो आवे ना पहचान में,
वाह रे जटाधारी तू तो रहता श्मशान में……
ना खाए मेवा ना खाए मिठाई,
भांग के नशे में तूने जिंदगी बिताई,
जिसने जो भी मांगा तूने दे दिया दान में
वाह रे जटाधारी तू तो रहता श्मशान में……
ऐसा है देव जो भी मांगो मिलेगा,
जटाधारी बोल दे जो वो ना टलेगा,
ऐसा चमत्कार भोले तेरी है जुबान में,
वाह रे जटाधारी तू तो रहता श्मशान में……

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile