उज्जैनी में बाबा ने ऐसा डमरू बजाया भजन लिरिक्स

उज्जैनी में बाबा ने ऐसा डमरू बजाया भजन में भक्तों ने महाकाल की महिमा का वर्णन किया है। यह भजन उज्जैन में स्थित महाकाल के मंदिर और वहां के पवित्र वातावरण को दर्शाता है। शिव के डमरू की ध्वनि से उत्पन्न ऊर्जा और उसकी महानता को लेकर यह भजन पूरी श्रद्धा और भक्ति से गाया जाता है। पंडित सत्य प्रकाश जी के द्वारा प्रस्तुत इस भजन के माध्यम से भक्तों का शिव के प्रति अनकही श्रद्धा और प्यार व्यक्त किया गया है, जो उनके जीवन को महान बनाता है।

Ujjaini Me Baba Ne Aisa Damaru Bajaya

उज्जैनी में बाबा ने ऐसा,
डमरू बजाया।
मैं सुध बुध भूल आया,
कितना प्यारा उज्जैनी।
यहां दरबार सजाया,
मैं सुध बुध भूल आया।।

सुनाने को बाबा मैं,
ऐसा सुनाऊंगा।
भजनों से भोले मैं जो,
तुमको रिझाऊंगा,
डमरू की धुन में।
बाबा ऐसा नाद बजाया,
मैं सुध बुध भूल आया।
उज्जैनी मे बाबा ने ऐसा,
डमरू बजाया,
मैं सुध बुध भूल आया।।

करूंगा मैं सेवा तेरी,
चरण पखारूंगा।
नैनो से भोले मैं हाँ,
तुमको निहारूंगा।
‘दीपक दास’ ने,
महाकाल तुम्हारा।
ही गुण गाया,
मैं सुध बुध भूल आया।
उज्जैनी मे बाबा ने ऐसा,
डमरू बजाया,
मैं सुध बुध भूल आया।।

उज्जैनी में बाबा ने ऐसा,
डमरू बजाया।
मैं सुध बुध भूल आया,
कितना प्यारा उज्जैनी।
यहां दरबार सजाया,
मैं सुध बुध भूल आया।।

उज्जैनी में बाबा ने ऐसा डमरू बजाया भजन में महाकाल की शक्ति और उनके प्रभाव को प्रस्तुत किया गया है। महाकाल के डमरू की ध्वनि में ऐसी अद्भुत शक्ति है, जो भक्तों के जीवन को रौशन करती है। यह भजन महाकाल के प्रति श्रद्धा को और गहरा करता है। इसके साथ-साथ, आप महाकाल को मनाएंगे भोलेनाथ को मनाएंगे, भोले शंकर की शान निराली और शिव शंकर डमरू धारी है जग के आधार जैसे भजनों के साथ अपने शिव भक्ति के सफर को और समृद्ध बना सकते हैं, जो शिव की महिमा और कृपा को और गहराई से महसूस करने में मदद करेंगे।

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