Tu Nageshwar Tu Hi Maheshwar
तू नागेश्वर तू ही महेश्वर, तू ही जग का दाता है,
तू नागेश्वर तू ही महेश्वर, तू ही जग का दाता है,
भक्तों के घर जो कुछ भी दिखता, तेरे ही धाम से आता है,
तू नागेश्वर तू ही महेश्वर, तू ही जग का दाता है,
तू नागेश्वर तू ही महेश्वर, तू ही जग का दाता है।
तुम हो स्वामी हम सेवक है,
मन से तुम्हारे उपासक है,
हम है सवाली तुम महादानी,
करुणा तुम्हारी है कल्याणी,
तू गंगाधर तू ही आदिश्वर,
तू ही भाग्य विधाता है,
भक्तों के घर जो कुछ भी दिखता,
तेरे धाम से आता है,
तू नागेश्वर तू ही महेश्वर तू ही जग का दाता है॥
हार पहनते हो नागो नागों के,
लीला ही अद्भुत करते हो,
तुम ही तो भस्म रमैया हो,
नैया के दिव्य खेवैया खिवैया हो,
तू योगेश्वर तू ही भूतेश्वर,
तीनो तीनों ही लोक चलाता है,
भक्तों के घर जो कुछ भी दिखता,
तेरे धाम से आता है,
तू नागेश्वर तू ही महेश्वर तू ही जग का दाता है॥
प्रजापति सिद्ध सन्यासी,
तुम ही हो कैलाश के वाशी,
दोनों के ही तुम पालक हो,
दोनों के ही तुम पालक हो,
सृष्टि के ही संचालक हो,
सृष्टि के ही संचालक हो,
तू सर्वेश्वर अर्धनारीश्वर,
तू ही बनाता मिटाता है,
भक्तों के घर जो कुछ भी दिखता,
तेरे धाम से आता है,
तू नागेश्वर तू ही महेश्वर तू ही जग का दाता है॥

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile