Tere Dar Ko Mai Chhod Kaha Jaun Na Duja Koi Dwar Na Dikhe
तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं,
ना दूजा कोई द्वार ना दिखे……
तुझ बिन जीना भी क्या जीना,
तेरा दर ही मेरा ठिकाना,
हो तेरे दर को मै….
तेरा दर्शन जब मै पाऊ,
दुनिया के गम भूल ही जाऊ,
हो तेरे दर को मै….
इतनी कृपा बस हम पर कर दे,
नाम तेरा गाऊ मुझे यही वर दे,
हो तेरे दर को मै….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile