शिव शंकर भोलेनाथ तेरा डमरू बाजे पर्वत पे लिरिक्स

शिव शंकर भोलेनाथ तेरा डमरू बाजे पर्वत पे भजन महादेव के उस अलौकिक तांडव का चित्रण करता है, जब वे अपने डमरू की धुन से पूरे ब्रह्मांड को आनंदित कर देते हैं। कैलाश पर्वत पर बैठे भोलेनाथ जब अपने डमरू को बजाते हैं, तो उससे उत्पन्न ध्वनि संपूर्ण सृष्टि में दिव्यता और ऊर्जा का संचार करती है। यह भजन हमें शिव की महिमा, उनके अनंत स्वरूप और उनके तांडव नृत्य के रहस्य से जोड़ता है, जिससे मन भक्तिभाव में डूब जाता है और शिवमय आनंद की अनुभूति होती है।

Shiv Shankar Bholenath Tera Damru Baje Parvat

शिव शंकर भोलेनाथ,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे,
शिवशंकर भोलेनाथ ओ नाथ,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे।1।

तेरा नीलकंठ पे धाम बना,
जहाँ सबका बिगड़ा काम बना,
तेरा नीलकंठ पे धाम बना,
जहाँ सबका बिगड़ा काम बना,
सारे जग की रखले बात,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे,
शिवशंकर भोलेनाथ ओ नाथ,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे।2।

तेरे जैसा औघड़ दानी ना,
तेरे जैसा कोई वरदानी ना,
तेरे जैसा औघड़ दानी ना,
तेरे जैसा कोई वरदानी ना,
मेरे भोले पिता मात,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे,
शिवशंकर भोलेनाथ ओ नाथ,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे।3।

तेरा सबसे रूप निराला है,
तू तो जोगी बड़ा मतवाला है,
तेरा सबसे रूप निराला है,
तू तो जोगी बड़ा मतवाला है,
तेरा पूजन हो दिन रात,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे,
शिवशंकर भोलेनाथ ओ नाथ,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे।4।

शिव शंकर भोलेनाथ,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे,
शिवशंकर भोलेनाथ ओ नाथ,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे।5।

“शिव शंकर भोलेनाथ तेरा डमरू बाजे पर्वत पे भजन शिव की महिमा को गाकर हमें उनके दिव्य स्वरूप के करीब ले जाता है। उनके डमरू की ध्वनि केवल संगीत नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की लय और जीवन की गति का प्रतीक है। महादेव की भक्ति से हर भक्त को शक्ति, साहस और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि आपको यह भजन पसंद आया, तो भोले तेरा डम डम डमरू बाजे, भोलेनाथ जी का डमरू दिन रात बज रहा है, डमरू बजा रहे भोले, और महाकाल की बारात में भी करें। इन भजनों को पढ़कर आप शिव की महिमा से ओत-प्रोत हो जाएंगे और उनकी कृपा आपके जीवन में सुख-शांति लाएगी। ????????✨

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