Shiv Ki Jata Se Barse
शिव की जटा से बरसे, गंगा की धार है, गंगा की धार है,
महीना ये सावन का है, छाई बहार है।
शिव की जटा से बरसे…….
कावड़िए भर भर के, चढ़ाने कावड़ निकले हैं,
हर जुबां से बम बम के, जय जयकारे निकले हैं,
शिवमय हुआ है देखो, सारा संसार है, सारा संसार है।
महीना ये सावन का है, छाई बहार है…..
भोले की भक्ति में, झूम रहे नर और नारी है,
अभिषेक करने को, भीड़ पड़ी भी भारी है,
सजा है शिवालय देखो, आज सोमवार है, आज सोमवार है।
महीना ये सावन का है, छाई बहार है……
मेरा भोला बाबा है, इनके भक्त सभी प्यारे,
इक लोटा जल से ही, कर दे ये वारे न्यारे,
राघव मिला है जो भी, बाबा का प्यार है, बाबा का प्यार है।
महीना ये सावन का है, छाई बहार है।
शिव की जटा से बरसे, गंगा की धार है, गंगा की धार है,
महीना ये सावन का है, छाई बहार है……

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile