Shiv Ji To Daya Ke Sagar Hai
शिव ही सत्य है,
शिव ही सुन्दर,
शिव ही सब गुण आगर है,
भोले दानी भोलेनाथ,
शिव जी तो दया के सागर है,
शिव जी तो दया के सागर है……..
गौरी पति शिव हर हर शम्भु,
जय कैलाशी भजा करो,
ॐ नमः शिवाय निरंतर,
मन ही मन में जपा करो,
नीलकंठ विष पिने वाले,
शिव अमृत के गागर है,
भोले दानी भोलेनाथ,
शिव जी तो दया के सागर है,
शिव जी तो दया के सागर है……
शिव का अद्भुत रूप निराला,
गले में सर्पो की माला,
तन पे भस्म रमाए जोगी,
मस्तक चंद्र है उजियारा,
जटा में सोहे गंगा जिनकी,
ऐसे शिव गंगाधर है,
भोले दानी भोलेनाथ,
शिव जी तो दया के सागर है,
शिव जी तो दया के सागर है………
अंत वही आरम्भ वही,
शिव से ही सारी सृष्टि है,
‘उर्मिल’ वो तो है बड़भागी,
जिस पर इनकी दृष्टि है,
सारे जग में शिव की सत्ता,
कण कण में शिव शंकर है,
भोले दानी भोलेनाथ,
शिव जी तो दया के सागर है,
शिव ही सत्य है,
शिव ही सुन्दर,
शिव ही सब गुण आगर है,
भोले दानी भोलेनाथ,
शिव जी तो दया के सागर है,
शिव जी तो दया के सागर है………

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile