Shiv Hoon
जो शांत होके गुंजता,
हां मैं ही तो वो शोर हुं,
आकाश हुं पाताल भी,
मैं सुखसम हुं विशाल भी,
शिव हुं,
शिव हुं….
पतन हुं मैं विकास हूं,
तमाश हूं मैं प्रकाश हूं,
रुद्र हुं निगल लू सब,
हां मैं ही वो विनाश हूं,
मैं खंड हुं मैं अखंड भी
प्रचंड हुं मैं,
मैं ही शांति,
मैं शिव हुं,
मैं ही तो हुं,
हां मैं शिव हुं,
शिव हुं,
शिव हुं,
शिव हुं….
मैं घोर हु मै अघोर हूँ,
वीभत्स हूँ मै विभोर हूँ,
मैं पूर्ण हूँ मैं शेष हूँ,
स्मगरा माई हाय विशेष हुण्,
जगत का हूं आधार मैं,
हां मै ही तू महेश हूँ,
हां मै ही तू महेश हूँ,
मैं शिव हुं,
मैं ही तो हुं,
हां मैं शिव हुं,
शिव हुं,
शिव हुं,
शिव हुं….
मैं आदि हूँ मैं चींटी हूँ,
मैं राख हुन ज्वलंत हूँ,
सिरजन मैं हुन मैं काल हुं,
हूँ सुंदर मैं विक्राल हूँ,
जो मृत्यु मोक्ष बाँटता,
हूँ मैं ही तो महाकाल हूँ।

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile