पारवती शिवजी से बोली नीलकंठ योगेश्वर भजन लिरिक्स

आज हम जिस भावनात्मक और मनोहर भजन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, उसका नाम है पारवती शिवजी से बोली नीलकंठ योगेश्वर यह भजन भगवान शिव और माता पारवती के मध्य हुए संवाद को दर्शाता है, जिसमें प्रेम, समर्पण और अध्यात्म की मधुर झलक मिलती है। जब हम इस भजन को पढ़ते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे हम स्वयं कैलाश पर्वत पर बैठकर इस दिव्य संवाद को सुन रहे हों।

Parvati Shivji Se Boli Nilkanth Yogeshwar Bhajan Lyrics

पारवती शिवजी से बोली,
नीलकंठ योगेश्वर,
तुम किसकी पूजा करते हो,
कौन है वो परमेश्वर,
हर हर महादेव हर हर महादेव,
हर हर महादेव हर हर महादेव,
शिवजी बोले श्रष्टि कर्ता,
जगत पति सर्वेश्वर,
निशदिन जिनका ध्यान धरूँ मैं,
वो है मेरे रामेश्वर,
हर हर महादेव हर हर महादेव,
हर हर महादेव हर हर महादेव।।

गौरी बोली वही राम क्या,
दशरथ पुत्र अयोध्या वासी,
चौदह बरस रहे जो बन में,
लोग कहे जिनको वनवासी,
शिवजी बोले सत्य कहा है,
वही राम है दशरथ नंदन,
ऋषि मुनि सब देवी देवता,
कहते है उनको दुःख भंजन

निराकार साकार हुए है,
वो मेरे परमेश्वर,
निशदिन जिनका ध्यान धरूँ मैं,
वो है मेरे रामेश्वर,
हर हर महादेव हर हर महादेव,
हर हर महादेव हर हर महादेव।।

बोली सती ये भेद है गहरा,
सकल जगत के प्राण अधारा,
किस हेतु फिर लखन सिया संग,
श्री राम वनवास सिधारे,
सुनो उमा अब ध्यान लगा के,
वो थी सारी राम की माया,
रावण के संहार की खातिर,
जगत पति ने खेल रचाया।

सदा सर्वदा पूज रहे है,
वो मेरे हृदयेश्वर,
निशदिन जिनका ध्यान धरूँ मै,
वो है मेरे रामेश्वर,
हर हर महादेव हर महादेव,
हर हर महादेव हर हर महादेव।।

कहा उमा ने जान गई मैं,
श्री राम है कर्ता कारण,
मन की दुविधा दूर हुई है,
शंका का अब हुआ निवारण,
है पति परमेश्वर मेरे,
परम सत्य है आपकी पूजा,
सारा भरम मिटा इस मन का,
आप राम का रूप है दूजा।

ब्रम्हा विष्णु स्वयं आप है,
सर्व रूप महेश्वर,
धन्य भई मैं पाकर तुमको,
हे मेरे परमेश्वर,
हर हर महादेव हर हर महादेव,
हर हर महादेव हर हर महादेव।।

पारवती शिवजी से बोली,
नीलकंठ योगेश्वर,
तुम किसकी पूजा करते हो,
कौन है वो परमेश्वर,
हर हर महादेव हर हर महादेव,
हर हर महादेव हर हर महादेव,
शिवजी बोले श्रष्टि कर्ता,
जगत पति सर्वेश्वर,
निशदिन जिनका ध्यान धरूँ मैं,
वो है मेरे रामेश्वर,
हर हर महादेव हर हर महादेव,
हर हर महादेव हर हर महादेव।।

“पारवती शिवजी से बोली नीलकंठ योगेश्वर” भजन शिव-पार्वती के पवित्र संवाद के माध्यम से शिव भक्ति की गहराई को उजागर करता है। ऐसे भजनों को पढ़ने और करने से न केवल शिवजी की करुणा और ज्ञान का अनुभव होता है, बल्कि हमारे हृदय में स्थायी शांति और भक्ति का वास होता है। यदि यह भजन आपको भावविभोर कर रहा है, तो “डमरू वाले बाबा तुमको आना होगा”, “भोले भंडारी त्रिपुरारी तेरे शीश बहे गंगा प्यारी”, “हे त्रिपुरारी हे गंगाधारी भोले शंकर”, और “डमरू वाले बाबा जटाधारी बाबा” जैसे अन्य शिव भजनों को भी अवश्य पढ़ें, और शिव जी की महिमा में मन, वचन और कर्म से लीन हों।

Leave a comment