जोगी पर्वत पे बैठा बैठा ध्यान धरे
शिव जी की तपस्या और वैराग्य का स्वरूप हमें सिखाता है कि सच्चा आनंद भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति में है। जोगी पर्वत पे बैठा बैठा ध्यान धरे भजन हमें भोलेनाथ के उसी ध्यानमग्न स्वरूप की अनुभूति कराता है, जहां वे कैलाश पर्वत पर समाधि लगाए समस्त सृष्टि के कल्याण का चिंतन कर … Read more