Padharo Virane Bholenath Ji
गूंजे अंबर बरसे सावन,
भक्त वी आए तुझे मनावन,
कल कल बहती जाए नदियां,
बजे जो डमरू लगे सब गावन,
लाए है टोली भूतों की साथ जी,
पधारे वीराने भोलेनाथ जी……
धरती सूरज चंदा सारे,
तीनो लोक से आए है,
बहुत भयंकर प्रेत भी है संग,
ढोल नगाड़े लाए है,
मुख से भोले भोले निकले क्या है बात जी,
पधारे वीराने भोलेनाथ जी……
आदि-नाथ ओ स्वरुप, उदय-नाथ उमा-महि-रुप।
जल-रुपी ब्रह्मा सत-नाथ, रवि-रुप विष्णु सन्तोष-नाथ।
आदि-नाथ कैलाश-निवासी, उदय-नाथ काटै जम-फाँसी।
सत्य-नाथ सारनी सन्त भाखै, सन्तोष-नाथ सदा सन्तन की राखै।
आदि-नाथ कैलाश-निवासी, उदय-नाथ काटै जम-फाँसी।
सत्य-नाथ सारनी सन्त भाखै, सन्तोष-नाथ सन्तन की राखै।
भोले के रंग अजब निराले,
पिए जो भोला विष के प्याले,
नंदी पर करते है सवारी,
गले में है वासुकी डाले,
सबसे ऊपर नाम है नाथों के नाथ जी,
पधारे वीराने भोलेनाथ जी……

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile