O Vish Pine Wale Chhupa Tu Kidhar Hai
मेरी जिंदगी में, ग़मों का ज़हर है,
विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,
ओ विष पीने वाले, छुपा तू किधर है…….
ना तुमसा दयालु, कोई और भोले,
ना तुमसा दयालु, कोई और भोले,
जो ठुकरा के अमृत को पिए विष के प्याले,
लिया तीनों लोकों का, भार अपने सर है,
विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,
ओ विष पीने वाले, छुपा तू किधर है……..
गरीबों का साथी ना बनता है कोई,
फ़साने भी उनके ना सुनता है कोई,
यहाँ फेर ली अपनों ने भी नजर है,
विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,
ओ विष पीने वाले, छुपा तू किधर है……..
बड़ी आस लेकर केतुमको पुकारा,
करदो दया मुझपे, हूँ ग़म का मारा,
कहे सोनू होता ना मुझसे सबर है,
विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,
ओ विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,
मेरी जिंदगी में, ग़मों का ज़हर है,
विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,
ओ विष पीने वाले, छुपा तू किधर है……..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile