Nath Main To Haar Gayi
नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी,
हम तो हुए पराए स्वामी, भांग लगे तुम्हें प्यारी,
नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी॥
हरी हरी भांग की बूटी देखो, सौतन बनी हमारी,
जंगल झाड़ दिखा दिए तुमने, काट काट मैं तो हारी,
नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी,
हम तो हुए पराए स्वामी, भांग लगे तुम्हें प्यारी,
नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी॥
तुम तो हो अलगस्ट भांग में, शिव भोले भंडारी,
राम नाम तुम दिन भर जपते, मैं मंदिर रखवाली,
नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी,
हम तो हुए पराए स्वामी, भांग लगे तुम्हें प्यारी,
नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी॥
भांग घोटत मेरी बईया दुखे, दुखत हाथ हमारे,
पीपी भांग रहो मस्ती में, सुद मेरी बिसराई,
नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी,
हम तो हुए पराए स्वामी, भांग लगे तुम्हें प्यारी,
नाथ मैं तो हार गई घोटत भांग तुम्हारी॥

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile