Mohe Jana Pade Jarur Bhola Baitha Baat Me
मेरे सिर पर गठरी भांग की मोहे जाना पड़े जरूर,
भोला बैठा बाट में….
मैं गई गंगा स्नान को,
मुझे पीछे आई ध्यान हो,
वहां भांग खड़ी घनघोर, भोला बैठा बाट में,
मेरे सिर पर गठरी भांग की…..
गोरा गठरी लावे भांग की,
मोहे घोट घोट के पिलावेगी,
वह तो रहे नशे में चूर, भुला बैठा बाट में,
मेरे सिर पर गठरी भांग की…..
गोरा रोवती डोले पहाड़ पर,
मेरी चुनरी इलझी झाड़ में,
यह पर्वत कितनी दूर, भोला बैठा बाट में,
मेरे सिर पर गठरी भांग की…..
मेरे पैरों में छाले पड़ गए,
गोदी में उठा ले ओ भोले,
हुई चलने से मजबूर, भोला बैठा बाट में,
मेरे सिर पर गठरी भांग की…..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile