मेरी अखियाँ तरस रही भोले का दीदार पाने को लिरिक्स

मेरी अखियाँ तरस रही भोले का दीदार पाने को — यह भजन उन भक्तों की व्यथा व्यक्त करता है जो अपने आराध्य महादेव के दर्शन के लिए तड़पते हैं। जब भक्ति सच्ची होती है, तो मन और आत्मा सिर्फ शिवशंकर के दिव्य रूप के दर्शन के लिए व्याकुल हो जाते हैं। भोलेनाथ की एक झलक भी भक्तों के जीवन को धन्य कर देती है। इस भजन के माध्यम से हम भी शिव जी के दरबार की ओर चलें और उनके चरणों में समर्पित हों।

Meri Akhiya Tars Rahi Bhole Ka Didar Pane Ko

मेरी अखियाँ तरस रही,
भोले का दीदार पाने को,
मैं भगत दीवाना तेरा,
दिखा दूंगा ज़माने को,
मेरी अँखियाँ तरस रही,
भोले का दीदार पाने को।1।

तेरी लगन में डूबा रहूँगा,
जब तक है सांसो में दम,
जितना चाहे ले ले इम्तेहा,
फिर भी आस ना होगी कम,
ये मन विचलित हो रहा भोले,
आ कुछ समझाने को,
मेरी अँखियाँ तरस रही,
भोले का दीदार पाने को।2।

कोई चढ़ाए सोना चांदी,
हीरे और मोती अनमोल,
मेरे पास प्रभु कुछ भी नहीं,
बस भक्ति लगन के मीठे बोल,
ये जीवन तुझपे अर्पण,
आ दया बरसाने को,
मेरी अँखियाँ तरस रही,
भोले का दीदार पाने को।3।

मेरी अखियाँ तरस रही,
भोले का दीदार पाने को,
मैं भगत दीवाना तेरा,
दिखा दूंगा ज़माने को,
मेरी अँखियाँ तरस रही,
भोले का दीदार पाने को।4।

महादेव के दर्शन मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है। शिव कृपा जिन पर बरसती है, उनके लिए यह संसार भी शिवमय हो जाता है। अगर यह भजन आपको शिव भक्ति में डुबो गया, तो दर्शन को हम तरसे ओ भोले तेरे, भोले के दरबार से खाली नहीं जाएंगे, जिसकी लागी लगन भोलेनाथ से, और शिव ही बसे हैं कण-कण में जैसे अन्य भजनों को भी अवश्य पढ़ें। हर हर महादेव! ????????

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