Mere Bhole Ka Roop Nirala Hai
जटा में गंगा को जिसने बाँध लिया सोने की लंका का रावन को दान दिया
हाथो में है तिरशूल है पकड़ा गल नागो की माला है
मेरे भोले का रूप निराला है मेरे शंकर का रूप निराला है,
देवी देवते भुत चुदैला मोह माया एहदे हथ दियां खेला
पिंडे अपने भस्म रमाये ना गोरा न काला है ,
मेरे भोले का रूप निराला है मेरे शंकर का रूप निराला है,
नील कंठ केलाश पति है शिव ही मेरे पार्वती है,
त्रिलोक के स्वामी मेरे तीन ही नेत्र वाला है,
मेरे भोले का रूप निराला है मेरे शंकर का रूप निराला है,
राजू मंगदा एहो दुआवा पूजे तेनु विच जग्रावा,
जिसने तेरी महिमा गाई सोनी तो किस्मत वाला है,
मेरे भोले का रूप निराला है मेरे शंकर का रूप निराला है,

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile