Mera Bhola Peeve Bhang
मेरा भोला पीवे भंग निमितया सी बडती जावे से
कही गोरा ल्यावे भंग घनी तू क्यों इतरावे से
भंग घोट के भोले मैं हारी मैं तो अपने पीहर जा रही
तू तो पी के मस्त मलंगा क्यों मेरी रेल बनावे से
मेरा भोला पीवे भंग ……….
भंग के पीवे भर भर लोटे क्यों कर रही से घनी तू टोटे
रे तेरे देख के कुंडी सोटे घनी मेरी आफत आवे से
मेरा भोला पीवे भंग …….
जाउंगी अब पीहर भोले गोरा करे बेकार के रोने,
भोले अब न घोटू भंग आदत तेरी बदती जावे से
भोले तेरे चरणों में जा के प्रियंका शीश झुकावे से
मेरा भोला पीवे भंग …….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile