भक्ति जब प्रेम में परिवर्तित होती है, तो वह एक अलौकिक आनंद बन जाती है। महारास में जाऊंगा मैं भी प्यारी भजन इसी दिव्य प्रेम की झलक दिखाता है, जहाँ शिवजी के अनंत स्वरूप और उनकी भक्ति में रमने का आनंद मिलता है। यह भजन हमें उस पावन क्षण का अनुभव कराता है जब भक्त, शिवजी की महिमा में पूरी तरह लीन होकर, उनकी भक्ति के महारास में खो जाता है। आइए, इस भजन को पढ़ें और शिव की आराधना में मन को तल्लीन करें।
Maharas Me Jaunga Main Bhi Pyari
महारास में जाऊंगा,
मैं भी प्यारी,
यूँ बाले त्रिपुरारी,
बात सुन ले म्हारी,
नहीं ले जाऊँगी,
मैं पकडी जाउँगी,
महारास में जाऊंगा,
मैं भेष छिपाऊँगा,
पर मैं जाऊँगा।1।
गोरा प्यारी पहनादे मुझे साडी,
मेरे माथे पे बिंदिया लगादे,
सजादे मुझे गोरा प्यारी,
जरा जुट का बना दूँ जुड़ा,
छोड दे चिंता सारी,
ओं रे प्यारी, ओं रे प्यारी।2।
कैसे मानू बात तुम्हारी,
तुम हो बड़े अनाडी,
ओ भोले भंडारी,
अगर कही में पकड़ी गई तो,
हंसी उड़ेगी म्हारी,
ओं भंडारी ओं भंडारी।3।
एक लहरी दार चुनर,
माथे पर डाल के,
भोले बन जाओ भोली,
घूंघट निकाल के।4।
तुम जो चलोगे कहां छिपेगा,
यह चंदा का उजाला,
यह चंदा का उजाला,
एक कर में है डमरु डोले,
दुजे में डोले त्रिशूल डाला,
इन सबको रखूंगा मैं,
झोले में डाल के,
भोले बन जाओ भोली,
घूंघट निकाल के।5।
तुम जो चलोगे कहां छिपेगा,
ये गंगा का पानी,
ये गंगा का पानी,
मरदानी आवाज को भोले,
कैसे करो जनानी,
भोले कैसे करो जनानी,
पकड़े ना जाओ भोले,
मर्दानी चाल से,
भोले बन जाओ भोली,
घूंघट निकाल के।6।
देख के भोले बाबा को तब,
बोले हैं कन्हाई,
बोले हैं कन्हाई,
सब आई है बिन घुंघट में,
यह घुंघट में क्यों आई,
घुंघट में कौन आई,
तब जाकर कान्हा ने,
पकड़ी है कलाई,
पकड़ी है कलाई,
पाले पड़ी है गोरी,
आज नंदलाल के,
भोले से बन गए भोली,
घुंघटा निकाल के,
भोले से बन गए भोली,
घूंघट निकाल के।7।
शिव भक्ति एक ऐसा अमृत है, जिसे ग्रहण करने से जीवन धन्य हो जाता है। इस भजन के माध्यम से हमने शिवजी की कृपा और उनके भक्ति रस का अनुभव किया। अगर आपका हृदय भी शिव प्रेम से भर गया है, तो शिव शंकर के गुण गाओ, भोलेनाथ की भक्ति में, शिव जी की बारात, और बम बम भोले की गूंज जैसे अन्य भजनों को भी पढ़ें और शिव नाम के आनंद में रम जाएं। ????????

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile