Mahakal Ko Manayenge
महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे ,
महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे ,
झूमो नाचों आओ, मिल गाओ रे भक्तो,
महिमा हम तो उनकी गायेगे , भोलेनाथ को मनायेगे,
महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे………..
मस्तक पर चंदा उनके हें साजे, उनके है साजे, उनके है साजे ,
गले में सर्पो की माला विराजे, माला बिराजे, माला बिराजे ,
जटाओ से गंगा बहती है कल-कल,
देवपित्रो को मुक्त करती है हर-पल ,
ऐसे भोले को मनायेगे, महांकाल को मनायेगे,
महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे……………
कैलाश पर्वत पर बैठे हें भोले, बैठे है भोले, बैठे है भोले ,
मृगो की छाला को, रहते है ओढ़े, रहते है ओढ़े, रहते है ओढ़े…………
तन पर भस्मी रमाये हुए है,
ध्यान मुद्रा वो लगाये हुए है ,
गुण उनके हम तो गायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे,
महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे………….
उज्जैयनी में रहते, बाबा महांकाल, मेरे महांकाल, बाबा महांकाल ,
माता शक्ति संग भैरव उनके साथ, शक्ति भी साथ, भैरव भी साथ,
नर नारी, जो कोई आये यहाँ पर ,
मन इच्छा पूरी हो जाये यहाँ पर,
सत्य कहे शिव को ध्यायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे,
महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे…………..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile